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Wednesday, January 28, 2026
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PM मोदी वायनाड लैंडस्लाइड प्रभावित इलाकों में पहुंचे:हवाई सर्वे किया; राहुल बोले- मुझे भरोसा है प्रधानमंत्री इसे राष्ट्रीय आपदा घोषित करेंगे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार (10 अगस्त) को केरल के वायनाड में लैंडस्लाइड प्रभावित इलाकों के दौरे पर हैं। वे सुबह 11 बजे स्पेशल विमान से कन्नूर एयरपोर्ट पहुंचे। कन्नूर से मोदी सुबह 11:15 बजे भारतीय वायु सेना के हेलीकॉप्टर से वायनाड गए।

उन्होंने रास्ते में लैंडस्लाइड प्रभावित चूरलमाला, मुंडक्कई और पुंचिरीमट्टम गांवों का हवाई सर्वेक्षण किया। मोदी ने वो जगह देखी, जहां से 30 जुलाई की रात तबाही शुरू हुई थी। इसी जगह से इरुवाझिनजी पुझा नदी भी शुरू होती है।

मोदी का हेलीकॉप्टर वायनाड स्थित कलपेट्टा के एक स्कूल कैंपस में उतरा। वे सड़क के रास्ते लैंडस्लाइड प्रभावित इलाकों में गए हैं। मोदी ने वहां रेस्क्यू ऑपरेशन की जानकारी ली। उन्होंने राहत शिविरों और अस्पतालों में पीड़ितों से भी मुलाकात की।

लोगों से मुलाकात के बाद प्रधानमंत्री मोदी अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे, जहां उन्हें हादसे और रेस्क्यू ऑपरेशन के बारे जानकारी दी जाएगी। पीएम के साथ केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी भी वायनाड गए हैं।

PM मोदी के वायनाड दौरे की तस्वीरें…

PM मोदी सुबह 11 बजे कन्नूर एयरपोर्ट पहुंचे। वे 11.15 बजे हेलिकॉप्टर से वायनाड रवाना हुए।
PM मोदी सुबह 11 बजे कन्नूर एयरपोर्ट पहुंचे। वे 11.15 बजे हेलिकॉप्टर से वायनाड रवाना हुए।
कन्नूर में राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान और CM विजयन ने PM का स्वागत किया।
कन्नूर में राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान और CM विजयन ने PM का स्वागत किया।
प्रधानमंत्री मोदी के हवाई सर्वे के दौरान सीएम पिनाराई विजयन भी उनके साथ थे।
प्रधानमंत्री मोदी के हवाई सर्वे के दौरान सीएम पिनाराई विजयन भी उनके साथ थे।

राहुल ने वायनाड दौरे के लिए पीएम का धन्यवाद दिया
नेता प्रतिपक्ष और वायनाड के पूर्व सांसद राहुल गांधी ने वायनाड दौरे को लेकर PM मोदी को धन्यवाद कहा है। उन्होंने X पर लिखा- PM के वायनाड जाने का फैसला अच्छा है। मुझे भरोसा है कि जब प्रधानमंत्री लैंडस्लाइड से हुई तबाही खुद देखेंगे, तो वह इसे राष्ट्रीय आपदा घोषित कर देंगे। राहुल संसद में वायनाड हादसे को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग कर चुके हैं।

वायनाड में 29 जुलाई की देर रात करीब 2 बजे और 30 जुलाई की सुबह 4 बजे के बीच मुंडक्कई, चूरलमाला, अट्टामाला और नूलपुझा गांवों में लैंडस्लाइड हुए थे। इसमें अब तक 400 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।

138 से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं। 9 दिन रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने के बाद 8 अगस्त को सेना वायनाड से वापस लौट गई है। अभी NDRF रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही है।

लाड़ली बहनों को मिले 1500 रुपए:सीएम डॉ. मोहन यादव ने ट्रांसफर किए 1897 करोड़; टीकमगढ़ में घुमाई लाठियां

टीकमगढ़। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को टीकमगढ़ में लाठियां घुमाईं। वे लाड़ली बहना उपहार और आभार कार्यक्रम में शामिल होने गए थे। यहां लाड़ली बहनों ने उन्हें 30 फीट लंबी राखी बांधी। सीएम ने कन्या पूजन किया। छोटी बच्ची को झूला भी झुलाया। इसके बाद जनसभा को संबोधित किया।

सीएम डॉ. मोहन ने जनसभा में कहा कि टीकमगढ़ के लिए सब कुछ मिलेगा, कांग्रेस ने कुछ नहीं दिया। सीएम ने किसानों से कहा कि अपनी जमीन मत बेचना। आने वाले समय में खेती से बहुत लाभ होगा। सरकार पशु पालकों के लिए भी बोनस चालू करेगी।

मृत्यु भोज और शादी में अनावश्यक खर्च न करें
सीएम ने कहा कि आप मृत्यु भोज और शादी विवाह में अनावश्यक खर्च न करें। पैसा बचाकर बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाएं। उन्होंने टीकमगढ़ की गुजिया और मुंगौड़ी की भी तारीफ की।

सीएम आज लाड़ली बहनों के खाते में 1500 रुपए और गैस सिलेंडर के लिए 450 रुपए सिंगल क्लिक के माध्यम से ट्रांसफर करेंगे। रक्षाबंधन के चलते इस बार महिलाओं के खातों में ढाई सौ रुपए अतिरिक्त डाले जाएंगे। कार्यक्रम में टीकमगढ़ जिले की करीब 25 हजार लाड़ली बहनें शामिल हुईं।

टीकमगढ़ में जल्द बनेगा मेडिकल कॉलेज
सीएम यादव ने कहा कि टीकमगढ़ में मेडिकल कॉलेज का निर्माण जल्द शुरू होगा। बहुत जल्द ग्वालियर में इन्वेस्टर मीट होगी और उसके बाद सागर में इन्वेस्टर मीट का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी जिलों में उद्योग लगाने की चेन तैयार की जाएगी।

कांग्रेस सरकार ठन-ठन गोपाल थी
मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस के समय सरकार ठन-ठन गोपाल थी। 2003 से पहले मध्य प्रदेश का बजट केवल 20 हजार करोड़ का था। अब मध्यप्रदेश का बजट साढ़े 3 लाख करोड़ हो गया है। आने वाले समय में प्रदेश के बजट को दोगुना यानी करीब 7 लाख करोड़ किया जाएगा।

 

आजमगढ़ में किसान की पुश्तैनी जमीन पर दबंगों का कब्जा | प्रशासनिक लापरवाही पर खुलासा

ये घटना निजामाबाद तहसील के सेमरी गांव की है, जहाँ कोदई पुत्र कतवारू नामक किसान के साथ यह अन्याय हुआ है। उन्होंने जिलाधिकारी को लिखे अपने शिकायत पत्र में बताया है कि दबंगों में सबरार अहमद पुत्र पलटू तेली, पति राम पुत्र जय हिन्द मौर्या, अवतार और विनोद मौर्या शामिल हैं, जिन्होंने उनकी जमीन पर कब्जा जमा लिया है। आबादी के उत्तर दिशा के अंदर है मुरलीधर उपाध्याय पुत्र रामाश्रय उपाध्याय, पश्चिम दिशा से है शिवरतन पुत्र भृगु मौर्य इन लोगों ने जमीन पर जब रंग कब्जा कर रखा है

सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस मामले में प्रशासन की लापरवाही भी साफ नजर आती है। कोदई ने 28 जून 2024 को जनसुनवाई के माध्यम से वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को शिकायत भेजी थी, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

किसान की आवाज को मीडिया के माध्यम से उठाने की कोशिश की गई है, ताकि उनकी पुश्तैनी जमीन उन्हें वापस मिल सके और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।

इस मामले में चार और भाई होसिला मौर्या, राम शब्द, राधेश्याम, और कोदई भी शामिल हैं, जिनकी जमीन पर भी कब्जा किया गया है। इन सभी किसानों का कहना है कि उनकी जमीन उनकी माँ की तरह है, जो उनके बुजुर्गों से उन्हें मिली है, और इसे फर्जी तरीके से कब्जा कर लिया गया है।

दोस्तों, यह घटना सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज की उस गंभीर स्थिति की ओर इशारा करती है, जहाँ गरीब किसानों की जमीनें दबंगों द्वारा हड़पी जा रही हैं और प्रशासन चुप है।

कोदई ने अपनी शिकायत में यह भी बताया कि जनसुनवाई के माध्यम से उन्होंने 28 जून 2024 को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आजमगढ़ को संदर्भ संख्या 15191240095860 के तहत शिकायत अग्रसित की थी। लेकिन प्रशासन ने अब तक कोई कार्यवाही नहीं की है। पीड़ित ने मीडिया के माध्यम से अपनी आवाज उठाई है और प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है।

होसिला मौर्या, राम शब्द, राधेश्याम, और कोदई इन चारों भाइयों की जमीन पर भी दबंगों ने अवैध कब्जा कर लिया है। किसान ने बताया कि यह जमीन उनके बुजुर्गों की पुश्तैनी जमीन है, जिसे दबंगों ने फर्जी तरीके से कब्जा कर लिया है। उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि उनकी जमीन उन्हें वापस दिलाई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

किसान ने कहा कि अगर भविष्य में उन्हें या उनके परिवार को कोई नुकसान होता है, तो इसके जिम्मेदार उपरोक्त दबंग और प्रशासन होगा।

 

अवैध रेत उत्खनन से रामनई का प्राकृतिक झरना और धार्मिक स्थल संकट में, ग्रामीणों का अनशन का ऐलान

अजयगढ़ तहसील के ग्राम रामनई में रेत माफियाओं के अवैध उत्खनन से हजारों वर्ष पुराना प्राकृतिक झरना और प्राचीन धार्मिक स्थल गंभीर संकट में आ गए हैं। ग्रामीणों के अनुसार, झरने के आसपास की भूमि पर दैत्याकार मशीनों से हो रहे उत्खनन के कारण झरने की जलधारा 50 प्रतिशत तक घट गई है, जिससे यह अद्वितीय प्राकृतिक धरोहर नष्ट होने की कगार पर है। इसके अलावा, पास के प्राचीन देवस्थान को भी इस अवैध गतिविधि से अपूरणीय क्षति पहुंच रही है।

झरना और देवस्थान पर मंडराया खतरा, ग्रामीणों का अनशन की चेतावनी

25 जून को सैकड़ों ग्रामीणों ने एकत्रित होकर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा और झरने व धार्मिक स्थल को बचाने की गुहार लगाई। उनकी चेतावनी स्पष्ट थी: यदि इस अवैध उत्खनन पर तुरंत रोक नहीं लगाई गई, तो पूरा गांव आमरण अनशन पर बैठने को मजबूर होगा। यह केवल उनकी आस्था और पर्यावरण की रक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि उनके जीवन की सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है।

ग्रामीणों का आरोप है कि बाहरी रेत माफिया, स्थानीय माफियाओं और अधिकारियों की सांठ-गांठ से इस विनाशकारी उत्खनन को अंजाम दे रहे हैं, जिससे गांव में भूस्खलन और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बढ़ गया है। गांव के लोग पूरी तरह इस प्राकृतिक झरने पर निर्भर हैं, और अब यह झरना विनाश के कगार पर पहुंच गया है।

मीडिया के माध्यम से ग्रामीणों की मदद की पुकार

ग्रामीणों ने मीडिया के माध्यम से मदद की गुहार लगाते हुए प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि जल्द से जल्द उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं, जिनकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन पर होगी। यह मुद्दा अब जनांदोलन का रूप लेता जा रहा है, और गांव के हर व्यक्ति ने संकल्प लिया है कि वे अपने झरने और देवस्थान को बचाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।

ई खबर मीडिया के लिए  ब्यूरो देव शर्मा की रिपोर्ट

 

मोहल्ले में पार्किंग विवाद के बाद हिंसक झड़प, पीड़ित ने लगाई न्याय की गुहार

आज हम एक ऐसी घटना के बारे में बात करने जा रहे हैं, जो लखनऊ के चिनहट थाना क्षेत्र के विमल नगर इलाके में घटी है। ये घटना दिखाती है कि कैसे छोटे-छोटे मुद्दे कभी-कभी बड़ी घटनाओं में तब्दील हो जाते हैं। इस मामले में एक पार्किंग विवाद ने हिंसक झड़प का रूप ले लिया, और पीड़ित ने अब न्याय के लिए पुलिस और मीडिया के माध्यम से गुहार लगाई है। आइए जानते हैं विस्तार से क्या है पूरा मामला।
घटना की शुरुआत होती है 17 जुलाई 2024 की रात, करीब 8:30 बजे। अखिलेश कुमार मौर्या, जो विमल नगर, कमता, लखनऊ में रहते हैं, का ऑटो UP32 LN-8157 उनके घर के पास गली में खड़ा था। तभी मोहल्ले के ही विनय रावत, उसका भाई, उसकी दो बहनें और उनकी माँ ने अखिलेश के ड्राइवर चंचल वर्मा से पार्किंग को लेकर बहसबाजी शुरू कर दी।

ड्राइवर चंचल वर्मा ने जब देखा कि मामला बिगड़ रहा है, तो उन्होंने तुरंत अखिलेश कुमार को फोन कर मौके पर बुलाया। अखिलेश के मौके पर पहुंचते ही माहौल और भी गर्म हो गया। विनय रावत और उसके परिवार के अन्य सदस्यों ने न केवल अखिलेश कुमार और उनके ड्राइवर को गंदी-गंदी गालियां दीं, बल्कि जब उन्होंने इसका विरोध किया तो उन पर जानलेवा हमला भी कर दिया।

विनय रावत के भाई ने सड़क पर पड़े लॉकिंग टाइल से अखिलेश के सिर पर हमला किया, जिससे उनका सिर फट गया और काफी खून बहने लगा। इस बीच शोरगुल सुनकर अखिलेश की भाभी भी उन्हें बचाने दौड़ीं, लेकिन हमलावरों ने उन्हें भी नहीं बख्शा। आरोप है कि उन्होंने उनकी भाभी को पकड़कर उनके कपड़े फाड़ दिए और सार्वजनिक तौर पर अपमानित करने की कोशिश की।

इतना ही नहीं, आरोपियों ने अखिलेश के ऑटो पर भी हमला कर दिया, जिसमें उन्होंने ईंट-पत्थर से शीशे तोड़ दिए और ऑटो को बुरी तरह से क्षतिग्रस्त कर दिया।

पुलिस की प्रतिक्रिया

इस घटना को देखकर पड़ोसियों ने तुरंत 100 नंबर पर कॉल करके पुलिस को बुलाया। पुलिस मौके पर पहुंची और अखिलेश कुमार को थाने जाकर लिखित शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी। हालांकि, अखिलेश ने कहा है कि पुलिस इस मामले में उचित कार्यवाही नहीं कर रही और उन पर समझौता करने का दबाव बना रही है।

अखिलेश का यह भी कहना है कि आरोपियों ने उन्हें हरिजन एक्ट के झूठे मामले में फंसाने और जान से मारने की धमकी भी दी है।

मीडिया के माध्यम से न्याय की गुहार

इस पूरी घटना के बाद, अखिलेश कुमार ने मीडिया के माध्यम से न्याय की गुहार लगाई है। उन्होंने मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश से भी आग्रह किया है कि इस मामले का संज्ञान लिया जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

तो दोस्तों, यह थी लखनऊ के चिनहट इलाके की एक घटना, जिसने पार्किंग विवाद से शुरू होकर हिंसा और अभद्रता तक का रूप ले लिया। ऐसे मामलों में हम सबकी जिम्मेदारी है कि हम अपने समाज में शांति और सद्भाव बनाए रखें और अगर कोई घटना होती है, तो उसके खिलाफ आवाज उठाएं।

ज़मीन विवाद में न्याय की पुकार: जगजीवन ने प्रशासन से की मदद की अपील

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के नवाबगंज क्षेत्र का है, जहां एक ज़मीन के विवाद ने गहरी जड़ें पकड़ ली हैं। बरौली मलिक लखियापुर चौराहे पर स्थित इस ज़मीन को लेकर जगजीवन नामक व्यक्ति ने 22 जुलाई 2024 को जिलाधिकारी महोदय के समक्ष प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया है।

जगजीवन का कहना है कि गाटा संख्या 1206 और 1207 पर उनका और उनके परिवार का स्वामित्व है, लेकिन उनके हिस्से की ज़मीन को धोखाधड़ी से बैनामा कर दिया गया है। इस धोखाधड़ी के खिलाफ उन्होंने न्याय की मांग की है।

जगजीवन का आरोप है कि इंद्रपाल नामक एक व्यक्ति, जो दबंगई से प्रभावित है, उनके हिस्से की ज़मीन पर कब्जा करने की कोशिश कर रहा है। इसके साथ ही संदीप, जो रामसागर का बेटा है, भी इस कब्जे में सहयोग कर रहा है।

जगजीवन का दावा है कि उन्होंने कभी भी अपनी ज़मीन का बैनामा नहीं किया है और यदि कोई बैनामा दिखाया जा रहा है तो वह पूरी तरह से फर्जी है।जगजीवन ने मीडिया के माध्यम से सरकार और अधिकारियों से अपील की है कि उनकी ज़मीन पर हो रहे इस अन्याय के खिलाफ उन्हें न्याय दिलाया जाए। साथ ही, उन्होंने आशंका जताई है कि इस विवाद के कारण उनके और उनके परिवार के जीवन को खतरा हो सकता है।

इस स्थिति को देखते हुए, जगजीवन ने प्रशासन से अपील की है कि उनकी ज़मीन पर किसी भी प्रकार के अनुचित हस्तक्षेप से उनकी रक्षा की जाए और न्याय दिलाया जाए।हमारी यही उम्मीद है कि प्रशासन इस मामले में त्वरित और निष्पक्ष कार्यवाही करेगा, ताकि पीड़ित को न्याय मिल सके और ऐसे विवादों का शांतिपूर्ण समाधान हो सके।

रूस की सबसे ऊंची चोटी माउंट एलब्रुस के लिए रवाना

आज मेरे गृह ग्राम मुल्लानी की बेटी प्रीति परमार व चेतन परमार दोनों रूस की सबसे ऊंची चोटी माउंट एलब्रुस के लिए आज उन्हें भारत का झंडा दिखाकर रवाना किया। जल्द ही वे दोनों माउंट एलब्रुस पर भारत का परचम लहराएंगे व आष्टा विधानसभा सहित पूरे मध्यप्रदेश का नाम रोशन करेंगें।रूस की सबसे ऊंची चोटी माउंट एलब्रुस के लिए रवाना …

आज मेरे गृह ग्राम मुल्लानी की बेटी प्रीति परमार व चेतन परमार दोनों रूस की सबसे ऊंची चोटी माउंट एलब्रुस के लिए आज उन्हें भारत का झंडा दिखाकर रवाना किया। जल्द ही वे दोनों माउंट एलब्रुस पर भारत का परचम लहराएंगे व आष्टा विधानसभा सहित पूरे मध्यप्रदेश का नाम रो
रोशनकरेंगें। रघुवीर परमार अरुण परमार पवन परमार मंत्री जी के साथ मौजूद रहे

संवाददाता राजकुमार पाल की रिपोर्ट आष्टा जिला सीहोर

इंस्टाग्राम रील्स के माध्यम से सरोज देवी यादव छूना चाहती हैं नई ऊंचाइयां!

आज हम बात करेंगे बिहार के जमुई जिले के लखनधनमा गांव की एक प्रेरणादायक कहानी के बारे में। 28 वर्षीय सरोज देवी, जो एक छोटे से गाँव से ताल्लुक रखती हैं, ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपने परिवार की गरीबी को दूर करने और अपनी एक नई पहचान बनाने का सपना देखा है।

सरोज देवी के पति राजेश यादव, पिता कपिल यादव, और माता सोनी देवी का उन्हें पूरा समर्थन मिला है। हाल ही में सरोज ने इंस्टाग्राम पर @sarojdevi8704 नाम से अपना अकाउंट बनाया और अपनी रील्स के माध्यम से इंटरनेट पर छा गईं। उनकी रील्स तेजी से वायरल हो रही हैं, और लोग उन्हें सोशल मीडिया क्वीन के नाम से पुकारने लगे हैं।

लेकिन सरोज का सफर यहीं खत्म नहीं होता। वह जल्द ही यूट्यूब पर भी अपना चैनल शुरू करने की योजना बना रही हैं, ताकि अपने गाँव, तहसील, और राज्य का नाम रोशन कर सकें। अभी हाल ही में, सरोज ने 100 सब्सक्राइबर्स का मील का पत्थर पार किया है, और अपने फॉलोअर्स के प्रति आभार व्यक्त करते हुए एक वीडियो भी साझा किया है।

सरोज देवी का सपना है कि उनके वीडियो और रील्स को ज्यादा से ज्यादा लोग देखें, लाइक करें, और शेयर करें। उनके इस सफर में हम सब का समर्थन बहुत महत्वपूर्ण है।

तो आइए, हम सब मिलकर सरोज देवी के इस सपने को साकार करने में उनका साथ दें। उनके साथ जुड़ें, उन्हें प्रोत्साहित करें, और उनके इस सफर का हिस्सा बनें।

28 साल की लड़ाई: सरकारी लालफीताशाही ने छीन ली कैलाश की जिंदगी

रतलाम ढोढर जिला रतलाम के कैलाश राठौड़ की जिंदगी एक ऐसी कहानी है, जो सरकारी तंत्र की नाकामी और लालफीताशाही की बेरहमी को उजागर करती है। यह कहानी एक ऐसे व्यक्ति की है, जिसने 28 साल से अपने हक के लिए एक असंभव सी लड़ाई लड़ी है, और अब उसकी आखिरी उम्मीद प्रधानमंत्री के दरवाजे पर दस्तक दे रही है।

कहानी की शुरुआत:
1995 में कैलाश राठौड़ ने अपने जीवन की सबसे बड़ी जंग शुरू की। उनके पास एक प्लाट था, जिस पर उन्होंने अपना मकान बनाया, लेकिन सरकारी दस्तावेजों में यह प्लाट उनके नाम नहीं बल्कि किसी और के नाम दर्ज हो गया। कैलाश ने अपनी जवानी से लेकर बुढ़ापे तक इस अन्याय के खिलाफ संघर्ष किया, लेकिन सरकारी दफ्तरों की अनदेखी और भ्रष्टाचार की गहरी जड़ें उनकी हर कोशिश को नाकाम करती रहीं।

सरकारी दफ्तरों के चक्कर:
कैलाश ने तहसील से लेकर अनुविभागीय अधिकारी तक, पटवारी से लेकर कलेक्टर तक सभी के दरवाजे खटखटाए, लेकिन हर जगह से उन्हें सिर्फ निराशा ही मिली। उनका प्लाट, जिसे उन्होंने अपने खून-पसीने की कमाई से खरीदा था, किसी और के नाम कर दिया गया। सरपंच और पटवारी की मिलीभगत ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया, और इसके खिलाफ उनकी हर लड़ाई को सिस्टम ने बेरहमी से कुचल दिया।

पीएमओ से जगी थी नई उम्मीद:
कैलाश के संघर्ष का एक और मोड़ तब आया जब 2018 में प्रधानमंत्री कार्यालय से उनके लिए एक पत्र आया। इस पत्र में स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि कैलाश की याचिका पर तुरंत कार्रवाई की जाए, लेकिन दुर्भाग्यवश, यह पत्र भी बाकी दस्तावेजों की तरह सिर्फ कागजों में ही सिमट कर रह गया। पत्र का नंबर PMOPG/D/2019/0305168 था, और उसमें कहा गया था कि कैलाश की याचिका पर उचित कार्रवाई की जाए और इसका जवाब पोर्टल पर अपलोड किया जाए, लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

समाज और पुलिस की ज्यादती:
कैलाश के संघर्ष को समाज ने भी पागलपन का नाम दे दिया। उनकी आवाज को दबाने के लिए उन्हें पागल घोषित कर दिया गया, पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया, और यहाँ तक कि डॉक्टरों की पैनल ने भी उन्हें मानसिक रोगी करार दिया। लेकिन कैलाश ने हार नहीं मानी। उन्होंने न्यायालय में लड़ाई लड़कर खुद को निर्दोष साबित किया, और इस अपमानजनक स्थिति से बाहर निकले।

जीवन के अंतिम पड़ाव पर भजन मंडली:
आज कैलाश राठौड़ अपने सपनों को जिंदा रखने के लिए भजन मंडली में काम कर रहे हैं। अपने प्लाट और मकान के लिए उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी दांव पर लगा दी, अपनी संपत्ति और व्यवसाय खो दिए, लेकिन उनकी उम्मीदें अभी भी जिंदा हैं। अब वे प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत एक नया मकान पाने की आस लगाए बैठे हैं। उनका विश्वास है कि प्रधानमंत्री उनसे मिलकर उनकी समस्या का समाधान करेंगे।

भविष्य की उम्मीदें:
कैलाश राठौड़ की यह संघर्ष यात्रा अभी खत्म नहीं हुई है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला, तो वे प्रधानमंत्री कार्यालय के सामने धरना देंगे। उन्होंने यह भी कहा है कि यदि उनके साथ कोई दुर्घटना होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी पूर्व और वर्तमान सरपंच ढोढर की होगी।

मुख्य बिंदु:
– 28 साल की लड़ाई: 1995 से कैलाश राठौड़ ने अपने प्लाट और मकान के लिए एक लंबी और कठिन लड़ाई लड़ी है।
– सरकारी तंत्र की अनदेखी: सरकारी अधिकारियों की लापरवाही और भ्रष्टाचार ने कैलाश के न्याय की आस को बार-बार तोड़ा है।
– प्रधानमंत्री कार्यालय का पत्र: पीएमओ के निर्देशों के बावजूद, कैलाश के मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
– समाज और पुलिस का दबाव: कैलाश को पागल घोषित कर समाज और पुलिस ने उनकी आवाज को दबाने की कोशिश की, लेकिन वे डटे रहे।
– भजन मंडली में जीवन:* अपने संघर्ष के बावजूद, कैलाश राठौड़ ने भजन मंडली में काम करते हुए अपने सपनों को जिंदा रखा है।

यह कहानी सिर्फ कैलाश राठौड़ की नहीं है, बल्कि उन लाखों लोगों की है जो आज भी अपने हक के लिए संघर्ष कर रहे हैं और सरकारी तंत्र की अनदेखी का शिकार हो रहे हैं। कैलाश की यह यात्रा दिखाती है कि कैसे एक व्यक्ति अपने न्याय की लड़ाई में पूरी व्यवस्था से जूझता है, और आज भी उम्मीद की किरण देख रहा है।

ई खबर मीडिया के लिए  ब्यूरो देव शर्मा की रिपोर्ट

 

नारायण सिंह चौहान का निधन

देवास पीपलरावां – गत दिवस भागीरथ चौहान  के मछले पुत्र एंव जगदिश, पंकज चौहान  के पिताजी तथा घासीराम चौहान, लालजीराम चौहान, शिवनारायण ,चौहान के छोटे भाई एवं मोहनलाल बाबुलाल चोहान के बडे भाई नारायण सिंह चौहान का लंबी बिमारी के चलते असामायिक निधन हो गया उनके निधन पर पत्रकार अंबारामशिंदे , मांगीलाल , रमेश चंद्र चौहान , शंकर सिंदल,दाऊद खां पठान,रायसिंह सेंधव,बनेसिंह मालवीय, पार्षद शाकीर पठान, जिवनसिंह परमार, डां. जसमत,आदि नगर के गणमान्य नागरिकगणो ने श्रद्धांजलि अर्पित की, इस अवसर पर डॉक्टर विक्रम सिंह चौहान निरीक्षक- मनोहर सिंह चौहान, उमेश चौहान, मानसिह, हुकुमचंद, डॉ सुरेंद्र चौहान,प्रेम नारायणी, लखन लाल एवं जीवन सिंह आदि उपस्थित थे ।

ई खबर मीडिया के लिए देवास  से विष्णु शिंदे  की रिपोर्ट