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Tuesday, January 27, 2026
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केंद्र सरकार ने स्टैंडिंग कमेटियों का गठन किया:कांग्रेस को चार समितियों की अध्यक्षता; राहुल गांधी रक्षा मामलों की समिति के मेंबर

मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में साल 2024-25 के लिए 24 डिपार्टमेंटल पार्लियामेंट्री स्टैंडिंग कमेटी का गुरुवार देर रात गठन किया गया। हर समिति में राज्यसभा और लोकसभा दोनों के सदस्य शामिल हैं।

कांग्रेस ने केंद्र सरकार से 6 स्टैंडिंग कमेटी की अध्यक्षता की मांगी थी, लेकिन उसे चार प्रमुख पैनलों की अध्यक्षता दी गई है। इसमें विदेश, शिक्षा, कृषि, ग्रामीण मामलों की समिति शामिल हैं।

राहुल गांधी को रक्षा मामलों की समिति का सदस्य बनाया गया है। सोनिया गांधी का नाम किसी भी समिति में नहीं है।

बीजेपी 11 समितियों की अध्यक्षता करेगी। TMC और DMK के खाते में 2 -2 समितियों की अध्यक्षता आई है। JDU, TDP, SP, शिवसेना (एकनाथ), NCP (अजित) को एक-एक समिति की अध्यक्षता दी गई है।

हर डिपार्टमेंटल पार्लियामेंट्री स्टैंडिंग कमेटी में 31 मेंबर्स होते हैं, जिसमें से 21 लोकसभा से और 10 राज्यसभा से चुने जाते हैं। इन सभी कमेटी का कार्यकाल एक साल से ज्यादा नहीं होता है।

24 विभागों की पार्लियामेंट्री कमेटी

सांसद समिति का नाम
1 भाजपा सांसद राधा मोहन सिंह (अध्यक्ष)
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी (सदस्य)
रक्षा मामलों की समिति
2 कांग्रेस सांसद शशि थरूर (अध्यक्ष)

भाजपा सांसद अरुण गोविल (सदस्य)

असदुद्दीन ओवैसी (सदस्य)

विदेश मामलों की समिति
3 कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल संबंधी समिति
4 कांग्रेस सांसद चरणजीत सिंह चन्नी कृषि, पशुपालन और खाद्य प्रसंस्करण संबंधी समिति
5 सपा सांसद रामगोपाल यादव स्वास्थ्य और परिवार कल्याण समिति
6 भाजपा सांसद निशिकांत दुबे (अध्यक्ष)

सदस्य
सपा सांसद जया बच्चन
शिवसेना (UBT) प्रियंका चतुर्वेदी
बीजेडी सांसद सुष्मित पात्रा
कांग्रेस सांसद केटीएस तुलसी
भाजपा सांसद अनिल बलूनी
भाजपा सांसद कंगना रनौत
भाजपा सांसद पूनम मादम
टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा

संचार और सूचना प्रौद्योगिकी समिति
7 कांग्रेस सांसद सप्तगिरि शंकर उलाका ग्रामीण और पंचायती राज
8 भाजपा सांसद भर्तृहरि महताब वित्त संबंधी समिति
9 बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर कोयला, खदान और इस्पात समिति
10 भाजपा सांसद राजीव प्रताप रूडी जल संसाधन समिति
11 डीएमके सांसद तिरुचि शिवा उद्योग संबंधी समिति
12 भाजपा सांसद डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल गृह मामलों की समिति
13 टीएमसी सांसद डोला सेन वाणिज्य संबंधी समिति
14 भाजपा सांसद सी एम रमेश रेल मामलों की समिति
15 एनसीपी (अजित) सांसद सुनील तटकरे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस
16 टीडीपी सांसद मगुंटा श्रीनिवासुलु रेड्डी आवास और शहरी मामलों
17 शिवसेना (एकनाथ) सांसद श्रीरंग अप्पा चंदू बारने ऊर्जा संबंधी समिति
18 टीडीपी सांसद मगुंटा श्रीनिवासुलु रेड्डी आवास और शहरी मामलों की समिति
19 भाजपा सांसद भुवनेश्वर कालिता विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पर्यावरण समिति
20 जेडी(यू) सांसद संजय झा परिवहन, पर्यटन और संस्कृति समिति
21 भाजपा सांसद बसवराज बोम्मई जलवायु परिवर्तन तथा श्रम संबंधी समिति
22 भाजपा सांसद पीसी मोहन सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता संबंधी समिति
23 भाजपा सांसद ब्रिज लाल कार्मिक, लोक शिकायत, विधि एवं न्याय समिति
24 डीएमके सांसद के.कनिमोझी उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण समिति

सरकार की पार्लियामेंट्री स्टैंडिंग कमेटी से जुड़े सवाल-जवाब…

सवाल: सरकार की कुल कितनी डिपार्टमेंटल पार्लियामेंट्री स्टैंडिंग कमेटी हैं? जवाब: भारत सरकार के सभी मंत्रालयों/विभागों से जुड़ी कुल 24 डिपार्टमेंटल पार्लियामेंट्री स्टैंडिंग कमेटी हैं। ये कमेटी दो प्रकार की होती हैं – पहली- स्टैंडिंग कमेटी, दूसरी- एड हॉक कमेटी। एड हॉक कमेटी को कुछ विशेष कामकाज के लिए बनाया जाता है। एक बार जब वो काम पूरा हो जाता है तो कमेटी खत्म कर दी जाती है।

सवाल: क्या लोकसभा-राज्यसभा में अलग-अलग कमेटी होती है? जवाब: कुल 24 पार्लियामेंट्री स्टैंडिंग कमेटी को दो हिस्सों में बांटा गया है। 16 कमेटी लोकसभा में आती हैं, वहीं 8 कमेटी राज्यसभा के अंतर्गत संचालित होती हैं।

सवाल: इन कमेटी में कितने मेंबर होते हैं? जवाब: इनमें से हर कमेटी में 31 मेंबर्स होते हैं, जिसमें से 21 लोकसभा से और 10 राज्यसभा से चुने जाते हैं। इन सभी कमेटी का कार्यकाल एक साल से अधिक नहीं होता है।

सवाल: कमेटी में सदस्यों का चयन कौन करता है? जवाब: स्टैंडिंग कमेटी के सदस्यों को, जिन्हें सांसदों के पैनल के रूप में भी जाना जाता है। इन्हें सदन के अध्यक्ष की तरफ से नॉमिनेट किया जाता है। ये अध्यक्ष के निर्देश के अनुसार काम करते हैं।

सवाल: कमेटी का कार्यकाल कितना होता है? जवाब: संसद में कुल 50 संसदीय कमेटी होती हैं। इनमें 3 फाइनेंशियल कमेटीज, 24 डिपार्टमेंटल कमेटीज, 10 स्टैडिंग कमेटीज और 3 एडहॉक कमेटीज का कार्यकाल 1 साल का होता है। 4 एडहॉक कमेटीज और 1 स्टैडिंग कमेटी का कार्यकाल 5 साल का होता है। वहीं, 5 अन्य स्टैडिंग कमेटीज का कार्यकाल फिक्स नहीं होता।

सवाल: पार्लियामेंट्री कमेटी का क्या काम होता है? जवाब: हर विभाग की कमेटी अलग होती है। उससे जुड़े मामलों में गड़बड़ी की जांच करना, नए सुझाव देना, नए नियम-कानून का ड्रॉफ्ट तैयार करना इन कमेटी का मुख्य काम है।

उदाहरण: कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल संसद की पब्लिक अकाउंट कमेटी (PAC) की अध्यक्षता करते हैं। यह कमेटी हाल में चर्चा में आई थी। खबर थी कि PAC सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) चीफ माधबी पुरी बुच पर लगे आरोपों की जांच कर सकती है। PAC इस मामले में वित्त और कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालयों के अधिकारियों से पूछताछ करने की तैयारी कर रही है। इस मामले में जांच के लिए बुच को सितंबर के अंत तक PAC के सामने पेश होने के लिए बुलाया जा सकता है।

सवाल: पार्लियामेंट्री कमेटी को ये अधिकार कहां से मिले? जवाब: पॉर्लियामेंट्री स्टैंडिंग कमेटी में शामिल सांसदों (कमेटी सदस्य) को संविधान के तहत दो अधिकार मिलते हैं। पहला आर्टिकल 105 – यह सांसदों को किसी कामकाज में दखल देने का विशेष अधिकार देता है। जिसके तहत वे कमेटी में अपनी राय और सुझाव देते हैं। दूसरा आर्टिकल 118- यह संसद के कामकाज में नियम-कानून बनाने का अधिकार देता है।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शनिवार (17 अगस्त) को साल 2024-25 के लिए 5 नई संसदीय समितियों का गठन किया है। ये समितियां सरकारी खर्चे की जांच करेगी। सभी समितियों के अध्यक्ष और सदस्य भी नियुक्त किए गए हैं।कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल को पब्लिक अकाउंट कमेटी (PAC) का अध्यक्ष बनाया गया। PAC का नेतृत्व आमतौर पर प्रमुख विपक्षी दल के सीनियर लीडर करते हैं।

प्लान कीजिए अपनी छुटि्टयां:वर्ल्ड टूरिज्म डे पर जानिए दुनिया के सबसे फेवरेट टूरिस्ट स्पॉट्स, कहां जाते हैं सबसे ज्यादा पर्यटक

दुनिया के सबसे खूबसूरत पर्यटन स्थल प्रकृति की अनोखी रचना है, साथ ही कुछ स्थल मानव द्वारा निर्मित अद्भुत संरचनाओं का प्रस्तुतिकरण करती हैं। दुनिया के खूबसूरत पर्यटन स्थल सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक दृष्टिकोण से भी अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं। ये स्थल पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करके न केवल उनके अनुभवों को समृद्ध करते हैं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करते हैं।

विश्व पर्यटन दिवस के मौके पर दुनिया भर में स्थित ऐतिहासिक इमारतों, धार्मिक स्थल, और यूनेस्को द्वारा घोषित विश्व धरोहरों के बारे में सभी को जागरूक किया जाता है, ताकि पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सके। वैसे तो दुनिया के सात अजूबों को सबसे प्रसिद्ध और खूबसूरत स्थलों में गिना जा सकता है। लेकिन इसके अलावा भी विश्व अद्भुत और आकर्षक पर्यटन स्थलों से समृद्ध हैं। विश्व पर्यटन दिवस के मौके पर लोगों के बीच अपनी अद्भुत सुंदरता के लिए प्रसिद्ध सबसे खूबसूरत पर्यटन स्थलों के बारे में जान सकते हैं। आइए जानते हैं कुछ ऐसे प्रमुख स्थलों के बारे में जो दुनिया के सबसे खूबसूरत पर्यटन स्थलों में गिने जाते हैं:

आल्प्स पर्वत श्रृंखला, स्विट्जरलैंड

वैसे तो स्विट्जरलैंड की सुंदरता विश्व विख्यात है लेकिन भारतीयों के बीच स्विट्जरलैंड एक ऐसे स्थल के रूप में मशहूर है जो कि सबसे बेस्ट हनीमून डेस्टिनेशन हो सकता है। फिल्मों का असर कह लें या स्विट्जरलैंड के मनमोहक दृश्य जो दुनिया में इसे सबसे सुंदर बनाते हैं। स्विट्जरलैंड की आल्प्स पर्वत श्रृंखला दुनिया के सबसे मनमोहक स्थानों में से एक है। बर्फ से ढके पहाड़, हरी-भरी घाटियां, और चमचमाती झीलें यहां का मुख्य आकर्षण हैं। जरमैट, इंटरलकेन, लूसर्न, और जंगफ्राओ यहां के प्रमुख पर्यटन स्थल हैं। वहीं स्कीइंग, हाइकिंग, और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए यह स्थान पर्यटकों का स्वर्ग माना जाता है।

पेरिस, फ्रांस

फ्रांस का पेरिस शहर भी अपनी अकल्पनीय सुंदरता के लिए लोकप्रिय है। पेरिस को “सिटी ऑफ लाइट्स” के नाम से जाना जाता है और यह शहर अपनी कला, फैशन, और ऐतिहासिक धरोहर के लिए प्रसिद्ध है। घूमने के लिए अधिकतर पर्यटक पेरिस का रुख करते हैं, जहां एफिल टॉवर, लौवर म्यूजियम, नॉट्रे डेम कैथेड्रल, और चैंप्स-एलिसी मुख्य आकर्षण हैं। अपने फैशन, कला, और रोमांस के लिए पेरिस दुनिया के सबसे पसंदीदा शहरों में से एक है।

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मालदीव

मालदीव के द्वीप अपनी साफ नीली समुद्री लहरों और सफेद रेत वाले बीच के लिए मशहूर हैं। जो लोग समुद्र तटों के बीच छुट्टी मनाने का शौक रखते हैं, वह मालदीव को अपनी लिस्ट में सबसे ऊपर रख सकते हैं। मालदीव के शानदार रिसॉर्ट्स, समुद्र के भीतर के विला, और कोरल रीफ्स यहां का मुख्य आकर्षण हैं। स्कूबा डाइविंग, स्नॉर्कलिंग, और पानी के खेलों के लिए यह एक प्रमुख स्थल है। सोशल मीडिया पर मालदीव की तस्वीरें ही लोगों को आकर्षित करती हैं।

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ग्रैंड कैन्यन

संयुक्त राज्य अमेरिका में स्थित ग्रैंड कैन्यन को सबसे खूबसूरत स्थलों में गिना जाता है। ग्रैंड कैनियन एक अद्वितीय भूगर्भीय स्थल है, जहां विशाल घाटियों और चट्टानों की सुंदरता आपको मंत्रमुग्ध कर देती है।नॉर्थ और साउथ रिम ग्रैंड कैन्यन के प्रमुख पर्यटन स्थल हैं। यह स्थान एडवेंचर और फोटोग्राफी प्रेमियों के लिए एक प्रमुख आकर्षण है।

पति और ससुराल वालों की प्रताड़ना से तंग आकर महिला की संदिग्ध मौत, पिता ने लगाया हत्या का आरोप

संत कबीर नगर, जनपद संत कबीर नगर के धनघटा थाना क्षेत्र के बरंडा गांव निवासी नईम अहमद ने अपनी बेटी गुलशन अंसारी की संदिग्ध मौत के बाद पति और ससुराल पक्ष के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं। नईम अहमद ने पुलिस को दी गई शिकायत में आरोप लगाया कि उनकी बेटी गुलशन अंसारी का विवाह वर्ष 2015 में मुस्लिम रीति-रिवाज से नबी अहमद पुत्र मुस्लिम, निवासी ग्राम टेटार, थाना महोली, जनपद संत कबीर नगर के साथ हुआ था। शादी के कुछ समय बाद ही गुलशन को दहेज की मांग को लेकर प्रताड़ित किया जाने लगा।

विवाह के बाद शुरू हुई प्रताड़ना

शादी के बाद गुलशन को न केवल मानसिक बल्कि शारीरिक रूप से भी प्रताड़ित किया जाने लगा। गुलशन के पति नबी अहमद और उसके परिवार के अन्य सदस्यों ने उस पर लगातार दहेज लाने का दबाव बनाना शुरू किया। गुलशन ने कई बार अपने पिता और परिवार को इस बारे में बताया, लेकिन उसे यह उम्मीद थी कि समय के साथ हालात सुधर जाएंगे।

पंचों की मध्यस्थता से समझौता

गुलशन के पिता नईम अहमद ने बताया कि जब स्थिति असहनीय हो गई, तो उन्होंने 20 जुलाई 2024 को ग्राम पंचायत के पंचों के सामने मामले को उठाया। पंचों की मध्यस्थता में दोनों पक्षों के बीच समझौता कराया गया, जिसमें नबी अहमद ने यह वादा किया था कि वह गुलशन के साथ कोई मारपीट या अभद्र व्यवहार नहीं करेगा। समझौते की शर्तों के अनुसार, 26 जुलाई 2024 को गुलशन की विदाई नबी अहमद के साथ की गई।

समझौते की शर्तें निम्नलिखित थीं:

1. मारपीट और गाली-गलौज बंद करने का वादा: नबी अहमद ने पंचों के सामने यह स्वीकार किया था कि वह गुलशन को शारीरिक या मानसिक रूप से प्रताड़ित नहीं करेगा। नबी ने वादा किया कि वह अपनी पत्नी के साथ अच्छे संबंध बनाए रखेगा।

2. भविष्य में विवाद न करने की सहमति: दोनों पक्षों ने यह भी तय किया कि भविष्य में किसी भी प्रकार का झगड़ा नहीं होगा और विवादों को आपसी सहमति से सुलझाया जाएगा।

3. दुर्व्यवहार पर कानूनी कार्रवाई: समझौते में यह भी शर्त रखी गई थी कि अगर नबी अहमद भविष्य में गुलशन के साथ दुर्व्यवहार करता है, तो उसे गुलशन के शादी से लेकर अब तक के सभी खर्चों की भरपाई करनी होगी और उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।

समझौते के बावजूद प्रताड़ना जारी

समझौते के बावजूद नबी अहमद और उसके परिवार का व्यवहार नहीं बदला। गुलशन को लगातार प्रताड़ित किया जाता रहा। नईम अहमद का कहना है कि उनकी बेटी ने कई बार उन्हें फोन कर यह बताया कि नबी अहमद और उसके परिवार वाले उसे दहेज के लिए प्रताड़ित कर रहे हैं। गुलशन का मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न बदस्तूर जारी रहा, लेकिन उसने अपने परिवार की प्रतिष्ठा और समाज के डर से इस मामले को आगे नहीं बढ़ाया।

संदिग्ध परिस्थितियों में मौत

6 सितंबर 2024 की शाम को एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जब गुलशन को उनके ससुराल वालों के घर की छत की कुंडी से लटका पाया गया। गांव के लोगों ने नईम अहमद को इस घटना की सूचना दी। शाम करीब 5:30 बजे यह घटना हुई, और जब तक नईम अहमद वहां पहुंचे, गुलशन का शव नीचे उतारा जा चुका था।

नईम अहमद का आरोप है कि उनकी बेटी की हत्या की गई है और इसे आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की गई है। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी कभी भी आत्महत्या जैसा कदम नहीं उठा सकती थी। गुलशन के पिता ने सीधे तौर पर गुलशन के पति नबी अहमद, सास फातिमा, देवर वसी अहमद और ननद इरकोना पर उनकी बेटी की हत्या का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि ससुराल पक्ष ने मिलकर गुलशन की हत्या की और फिर उसे आत्महत्या का रूप देने के लिए उसके शव को छत की कुंडी से लटका दिया।

पिता ने दर्ज कराई शिकायत, आरोपियों पर कार्रवाई की मांग

नईम अहमद ने थानाध्यक्ष महोली को दी गई तहरीर में यह साफ किया कि उनकी बेटी को शादी के बाद से ही दहेज की मांग को लेकर प्रताड़ित किया जा रहा था। उन्होंने गुलशन के पति नबी अहमद और ससुराल पक्ष के अन्य सदस्यों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर उन्हें सख्त से सख्त सजा दिलाने की मांग की है। उन्होंने यह भी कहा कि गुलशन को बार-बार प्रताड़ित करने के बावजूद पुलिस और प्रशासन ने समय रहते कोई कार्रवाई नहीं की, जिसकी वजह से आज यह दुखद घटना घटी।

थानाध्यक्ष महोली से अनुरोध किया गया है कि इस गंभीर मामले की जांच कर आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए ताकि गुलशन को न्याय मिल सके।

क्यों न्याय मिलने में हो रही देरी?

महिला हेल्पलाइन नंबर पर भी फोन करने पर आज तक नहीं हुई कोई कार्यवाही और ने आरोपियों की कोई गिरफ्तारी हुई पिता ने मीडिया के माध्यम से लगाई न्याय की गुहार पीड़ित पिता न्याय के लिए दर-दर भटकनें को मजबूर आरोपियों पर कोई नहीं हुई कार्यवाही और आरोपी खुले आम घूम रहे हैं इस प्रकार की घटनाओं से समाज पर क्या असर पड़ता है पीड़ित पिता ने कहा कि अगर मेरी बच्ची को न्याय मिले तो उसकी आत्मा को शांति मिल सके और समाज में ऐसी घटनाओं के प्रति सरकार और पुलिस प्रशासन सतर्क रहे ताकि गुलशन के साथ जो हुआ वह किसी और के साथ ना हो।

मृतक गुलशन के पिता नईम अहमद ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया की विदाई के समय एक नहीं बल्कि पति को सौ बार बताया कि मेरी बेटी के साथ मारपीट और अभद्र व्यवहार नहीं करेगा परंतु उसने किसी की एक न मानी और वह मेरी बेटी के साथ अभद्र व्यवहार करता रहा अपने परिवार की लाज के लिए उसने अपने माता-पिता को कुछ नहीं बताया दहेज प्रताड़ना का मुकदमा न्यायालय में चला हुआ है और वह सारे दस्तावेज पिता नईम अहमद के पास मौजूद हैं उन्होंने कहा कि वह अपनी बेटी को न्याय दिला कर रहेंगे और आरोपियों को जेल तक पहुंचाएंगे और इसमें जो आर्थिक नुकसान हुआ है उसकी भरपाई भी ससुराल वालों और आरोपी पति से की जाएगी। इस मामले में पुलिस भी किसी प्रकार की मदद नहीं कर रही और आरोपी सरेआम घूम रहे है। अतः पीड़ित पिता नईम अहमद नें सरकार से लगाई इंसाफ और मदद की गुहार।

ई खबर मीडिया के लिए  ब्यूरो देव शर्मा की रिपोर्ट

फर्जी दस्तावेज़ों से सरकारी नौकरी हासिल करने का मामला: राज्य महिला आयोग में शिकायत, नियुक्ति रद्द करने की मांग

धार जिले के डिलवानी गांव में फर्जी दस्तावेज़ों के आधार पर सरकारी नौकरी पाने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। प्रार्थी कविता अनारे, पत्नी पातल सिंह अनारे ने राज्य महिला आयोग, भोपाल, म.प्र. शासन के समक्ष शिकायत दर्ज कराते हुए भुरीबाई, पत्नी मोहब्बत पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

कविता अनारे का कहना है कि पटेलपुरा ग्राम, दिलवानी में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के पद के लिए निकली सूची में उनका नाम दूसरे स्थान पर था, लेकिन भुरीबाई ने फर्जी 12वीं की अंकसूची दिखाकर नौकरी हथिया ली। कविता का आरोप है कि भुरीबाई कई बार 12वीं में फेल हो चुकी थी, फिर भी उसने महाराष्ट्र बोर्ड से 77% अंक प्राप्त करने का दावा किया, जो संदेहास्पद है।

कोरोना काल में परीक्षा पर संदेह

कविता ने बताया कि 2020-21 के कोरोना काल में, जब देशभर में यात्रा प्रतिबंध थे, भुरीबाई महाराष्ट्र कैसे जाकर परीक्षा देकर अच्छे अंक प्राप्त कर पाई? यह संदेह का विषय है। उन्होंने भुरीबाई की 12वीं की अंकसूची को फर्जी बताया और उसकी गहन जांच की मांग की है।

फर्जी दस्तावेज़ों का खेल?

प्रार्थी का कहना है कि भुरीबाई की शैक्षणिक योग्यता पहले से ही संदिग्ध रही है और गांव में चर्चा थी कि वह पढ़ाई में कमजोर थी। कविता ने मांग की है कि अगर भुरीबाई की अंकसूची फर्जी साबित होती है, तो उसकी नियुक्ति निरस्त कर कानूनी कार्रवाई की जाए।

कोई कार्रवाई नहीं होने पर राज्य महिला आयोग से गुहार

कविता ने पहले महिला एवं बाल विकास परियोजना बाग के अधिकारी के समक्ष शिकायत की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अंततः उन्होंने राज्य महिला आयोग से न्याय की अपील की है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

पीड़ित परिवार ने मीडिया के माध्यम से न्याय की गुहार लगाई है कि फर्जी तरीके से लगी नियुक्ति को निरस्त किया जाए और वास्तविक हकदार को नौकरी दी जाए।

ई खबर मीडिया के लिए  ब्यूरो देव शर्मा की रिपोर्ट

 

 

बर्थ एनिवर्सरी-देव आनंद को देख फैंस ने तुड़वाए थे दांत:’गाइड’ बनाने पर लोगों ने कहा था-पागल हो क्या, बर्बाद हो जाओगे

देव आनंद। हिंदी सिनेमा के एक ऐसे स्टार जिनकी लोकप्रियता केवल भारत ही नहीं बल्कि विदेश में भी थी।

लाहौर से ग्रेजुएशन करने के बाद 1943 में जेब में 30 रुपए लेकर देव आनंद बॉम्बे आए और फिर सुपरस्टार बन गए। 3 दिसंबर, 2011 को उनका निधन हो गया था।

आज देव आनंद के 101वें जन्मदिन के मौके पर नजर डालते हैं उनसे जुड़े दिलचस्प किस्सों पर…

किस्सा 1: जब देव आनंद जैसी स्माइल के लिए फैंस तुड़वाने लगे दांत 1943 में जब देव आनंद लाहौर से बॉम्बे आए थे तो शुरुआत में उन्हें क्लर्क की नौकरी करनी पड़ी। इसके बाद ब्रिटिश सरकार के दफ्तर में उन्होंने सैनिकों की चिट्ठियां पढ़ने का काम किया, लेकिन इसमें मन नहीं रमा तो एक्टर बनने की ठानी। एक दिन उनकी मुलाकात फिल्म प्रोड्यूसर बाबूराव से हुई। देव आनंद की कदकाठी, चाल-ढाल और हावभाव से बाबूराव इंप्रेस हो गए और उन्हें 1946 में आई फिल्म ‘हम एक हैं’ में रोल दे दिया।

इस बारे में देव आनंद ने अपनी किताब ‘रोमांसिंग विद लाइफ’ में लिखा था – ‘फिल्म की शूटिंग के दौरान मुझसे कहा गया कि मेरे दांतों के बीच गैप है जिसके लिए फिलर देना पड़ेगा। मैंने इनकार नहीं किया और फिलर भर दिया गया, मगर मुझे ये अटपटा लग रहा था। मैंने फिल्म के मेकर्स से फिलर हटाने की गुजारिश की और उन्होंने फिलर हटा दिया। मैं इस बात से खुश था कि फिल्मों में मैं जैसा था जनता ने मुझे वैसे ही पसंद किया था।’

‘हरे रामा हरे कृष्णा’, ‘जॉनी मेरा नाम’ जैसी हिट फिल्मों के बाद देव आनंद इतने मशहूर हो गए थे कि लड़के उनके जैसे दांतों का शेप रखने के लिए अपने दांत तक तुड़वाने लगे थे।

किस्सा 2: जब इंडोनेशिया के पूर्व राष्ट्रपति ने देखी शूटिंग इंडोनेशिया के पूर्व राष्ट्रपति सुकर्णो भी देव आनंद के फैन थे। इससे जुड़ा एक किस्सा देव आनंद ने अपनी किताब रोमांसिंग विद लाइफ में शेयर किया था। उन्होंने कहा था, फिल्म ‘काला पानी’ की शूटिंग देखने इंडोनेशिया के पूर्व राष्ट्रपति सुकर्णो आए थे।

उस दिन हम ‘बेखुदी में तुमको पुकारे चले गए’ गाने की शूटिंग कर रहे थे। हमें पहले ही बता दिया गया था कि वो सेट पर आएंगे। हमने दो घंटे उनका इंतजार किया, लेकिन वे नहीं आए तो हमने गाना शूट कर लिया। शूटिंग खत्म होते ही राष्ट्रपति आ गए। हमने उनके लिए दोबारा शूटिंग की। उन्होंने शूटिंग के दौरान खूब तालियां बजाई थीं।

जवाहरलाल नेहरू के साथ देव आनंद।
जवाहरलाल नेहरू के साथ देव आनंद।

किस्सा 3: जब देव आनंद की बात सुनकर हंस पड़े जवाहरलाल नेहरू ये किस्सा 1947 का है जब प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने देव आनंद को खाने पर बुलाया था। इस दौरान देव आनंद के साथ राज कपूर और दिलीप कुमार भी मौजूद थे। तीनों रियल लाइफ में काफी गहरे दोस्त थे।

देव आनंद ने इस मुलाकात का किस्सा अपनी किताब रोमांसिंग विद लाइफ में शेयर करते हुए लिखा है, जब हम उनसे (नेहरू) मिलने पहुंचे तो उन्होंने हम तीनों को गले लगाया। वो बीमार चल रहे थे, लेकिन फिर भी हमसे बेहद गर्मजोशी से मिले। राज कपूर ने उनसे पूछा, ‘पंडितजी हमने सुना है आप जहां भी जाते थे महिलाएं आपके पीछे भागा करती थीं।

नेहरू ने कहा, मैं इतना पॉपुलर नहीं जितने तुम लोग हो। फिर मैंने उनसे सवाल किया, आपकी स्माइल ने लेडी माउंटबेटन को इम्प्रेस कर दिया था। क्या ये बात सच है?

नेहरू ने जोर से हंसते हुए कहा, अपने बारे में ये कहानियां सुन कर मुझे बेहद मजा आता है।

फिर दिलीप कुमार बोल पड़े, मगर लेडी माउंटबेटन ने खुद कहा था कि आप उनकी कमजोरी थे। नेहरू फिर जोर से हंसे और बोले, लोग चाहते हैं कि मैं इन कहानियों पर यकीन कर लूं।

'गाइड' के लिए देव आनंद को बेस्ट एक्टर और वहीदा रहमान को बेस्ट एक्ट्रेस का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था।
‘गाइड’ के लिए देव आनंद को बेस्ट एक्टर और वहीदा रहमान को बेस्ट एक्ट्रेस का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था।

किस्सा 4: ‘गाइड’ बनाने पर लोगों ने कहा- पागल 1965 में रिलीज हुई फिल्म ‘गाइड’ देव आनंद के करियर की सबसे बड़ी फिल्मों में एक थी। यह फिल्म उस जमाने के हिसाब से काफी बोल्ड थी जिसमें एक्स्ट्रामैरिटल अफेयर को दिखाया गया था। यही वजह है जब देव आनंद इस फिल्म को बना रहे थे तो फिल्म इंडस्ट्री के कुछ लोगों ने उन पर सवाल उठाए। ये बात देव आनंद ने खुद एक इंटरव्यू में बताई थी।

उन्होंने कहा था, जब हमने गाइड बनाई जो कि एडल्ट्री पर थी। लोगों ने मुझे कहा ये पागल हो गया है। देव अपने आपको बर्बाद कर रहा है, इसका स्टारडम खत्म हो जाएगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब फिल्म बन गई और देव आनंद ने फिल्म इंडस्ट्री के लिए एक स्पेशल प्रीमियर शो रखा तो कई सेलेब्स फिल्म देखने तो आए, लेकिन उन्होंने शो के बाद एक शब्द भी नहीं कहा। जब फिल्म रिलीज हुई तो धीरे-धीरे इसे पॉजिटिव रिव्यू मिलने लगे और फिल्म देखने के लिए दर्शक सिनेमाघरों का रुख करने लगे। इसे आज भी क्लासिक फिल्म माना जाता है।

किस्सा 5: जब डाकू ने खटखटाया देव आनंद के कमरे का दरवाजा बात 1957 की है जब देव आनंद फिल्म ‘नौ दो ग्यारह’ की शूटिंग कर रहे थे। शूटिंग मध्यप्रदेश के शिवपुरी में चल रही थी। उस दौर में उस इलाके में डाकुओं का बोलबाला था। शूटिंग का पैकअप होने के बाद देव आनंद सहित पूरी टीम एक गेस्ट हाउस में ठहरी थी। आधी रात को किसी ने देव आनंद के कमरे का दरवाजा खटखटाया।

उन्होंने अंदर से पूछा-कौन है? आवाज आई- हम हैं अमर सिंह। देव आनंद ने डरते हुए दरवाजा खोला तो सामने बड़ी-बड़ी मूंछों वाला डाकू खड़ा था। देव आनंद कुछ बोल पाते, इससे पहले ही डाकू ने एक्टर की तस्वीर निकाली और कहा-आप इस पर अपने साइन कर दीजिए। ये सुनते ही देव आनंद की जान में जान आई। उन्होंने झट से अपनी तस्वीर पर ऑटोग्राफ दिया जिसे देखकर डाकू ने कहा-देव साहब आपको कभी भी किसी चीज की जरूरत पड़े तो हमें याद कीजिएगा।

फिल्म हरे रामा हरे कृष्णा में जीनत अमान और देव आनंद।
फिल्म हरे रामा हरे कृष्णा में जीनत अमान और देव आनंद।

किस्सा 6: जीनत अमान ने ऑफर की सिगरेट और देव आनंद ने कहा- हीरोइन बनोगी? देव आनंद ने बड़े भाई चेतन आनंद के साथ मिलकर 1949 में अपना बैनर नवकेतन लॉन्च किया था। इसके बैनर तले बनी सबसे सफल फिल्मों में से एक 1971 में आई फिल्म ‘हरे रामा हरे कृष्णा’ थी जिसमें देव आनंद की बहन के किरदार में जीनत अमान नजर आई थीं। फिल्म में जीनत की कास्टिंग के पीछे भी एक दिलचस्प किस्सा है। दरअसल, उस दौर में कोई भी एक्ट्रेस देव आनंद की बहन का किरदार नहीं निभाना चाहती थी। देव आनंद भी ऐसा चेहरा ढूंढ-ढूंढकर थक गए थे। तभी एक पार्टी में उनकी नजर मिस एशिया का खिताब जीत चुकी जीनत अमान पर पड़ी। जीनत देव आनंद के सामने बैठी थीं।

देव आनंद को जीनत में अपनी फिल्म की मेन लीड एक्ट्रेस की छवि दिख गई। देव आनंद ने देखा कि जीनत ने अपनी जेब से सिगरेट का पैकेट और लाइटर निकाला। फिर सिगरेट होठों से दबाई और उसे लाइटर से जलाया। जब जीनत की नजर उन्हें देख रहे देव आनंद पर पड़ी तो उन्होंने प्यारी सी स्माइल देकर देव आनंद को भी सिगरेट ऑफर की। देव आनंद इनकार नहीं कर सके। फिर देव आनंद ने उनसे पूछा कि क्या आप फिल्मों में काम करेंगी? जीनत ने देव आनंद के चेहरे पर सिगरेट का धुआं छोड़ा और उन्हें देखती रहीं। देव आनंद ने अगला सवाल करते हुए कहा कि क्या मैं तुम्हें स्क्रीन टेस्ट के लिए बुला सकता हूं।

जीनत ने पूछा, कब?

देव आनंद ने कहा कल आ जाओ। जो भी समय तुम्हें सही लगे। जीनत अगले दिन स्क्रीन टेस्ट के लिए पहुंच गईं और इस तरह उन्हें अपनी डेब्यू फिल्म मिली।

फिल्म में जीनत अमान पर फिल्माया और आशा भोसले का गाया गाना ‘दम मारो दम’ बेहद पॉपुलर हुआ और जीनत बड़ी स्टार बन गईं।

तीसरे स्पिनर के साथ उतर सकती है टीम इंडिया:कुलदीप या अक्षर किसे मिलेगा मौका; दूसरे टेस्ट के लिए पॉसिबल प्लेइंग-11

भारत और बांग्लादेश के बीच टेस्ट सीरीज का दूसरा मैच कल से कानपुर के ग्रीन पार्क स्टेडियम में खेला जाएगा। भारत दो मैचों की सीरीज में 1-0 से आगे है।

ग्रीन पार्क में पेसर्स के मुकाबले स्पिनर्स को ज्यादा विकेट मिले हैं। इसे देखते हुए भारतीय टीम 3 स्पिनर्स को मौका दे सकती है। अगर 3 स्पिनर रहे तो कुलदीप यादव या अक्षर पटेल में से किसी एक को मौका मिल सकता है।

बैटिंग लाइन-अप में बदलाव नहीं होगा कानपुर में संभव है कि बैटिंग लाइन-अप में बदलाव नहीं होगा। इसमें पांच बैटर और एक विकेटकीपर को मौका मिलेगा। विराट कोहली, केएल राहुल और विकेटकीपर ऋषभ पंत जैसे सीनियर प्लेयर्स की टेस्ट टीम में वापसी हो चुकी है। पंत ने तो पहले टेस्ट के दूसरी पारी में शतक लगाकर शानदार वापसी की। टॉप-3 पोजिशन पर रोहित शर्मा, यशस्वी जायसवाल और शुभमन गिल का खेलना तय है।

2 ऑलराउंडर्स का खेलना तय टॉप-6 बैटर्स के बाद टीम इंडिया रवींद्र जडेजा और पिछले मैच में सेंचुरी लगाने वाले रविचंद्रन अश्विन के रूप में 2 सीनियर स्पिन बॉलिंग ऑलराउंडर्स को मौका देगी। स्पिन डिपार्टमेंट में अगर टीम ने 3 बॉलर्स रखे तो कुलदीप यादव या अक्षर पटेल में से किसी एक को ही मौका मिला। बांग्लादेश को देखते हुए टीम इंडिया अपनी बॉलिंग डिपार्टमेंट को ही मजबूत करने पर ध्यान देगी। ऐसे में कुलदीप यादव को प्लेइंग-11 में शामिल कर सकती है।

2 तेज गेंदबाजों को मिल सकता है मौका भारत प्लेइंग-11 में 2 तेज गेंदबाजों को मौका दे सकता है। इसमें जसप्रीत बुमराह खेल सकते हैं। उनके अलावा मोहम्मद सिराज, यश दयाल और आकाश दीप रेस में हैं। पिछले मैच में मोहम्मद सिराज और आकाश दोनों ने अच्छा प्रदर्शन किया था। इसलिए इन्हीं 2 में से किसी एक को मौका मिलेगा। सिराज का इकोनॉमी रेट अच्छा था, इसलिए सिराज यहां बाजी मार सकते हैं। यश दयाल अब तक डेब्यू नहीं कर सके हैं, इसलिए उन्हें मौका मिलना मुश्किल है।

जुरेल, दयाल और सरफराज को रिलीज कर सकती है टीम ध्रुव जुरेल, यश दयाल और सरफराज खान अगर प्लेइंग-11 का हिस्सा नहीं हुए तो टीम उन्हें ईरानी कप के लिए रिलीज कर सकती है। वहीं अक्षर पटेल और आकाश दीप को बेंच पर बैठना पड़ सकता है।

 

बांग्लादेश भी प्लेइंग-11 में तीसरा स्पिनर शामिल कर सकती है दूसरे टेस्ट में बांग्लादेश के भी प्लेइंग-11 में एक बदलाव हो सकता है। टीम में 2 स्पिन बॉलिंग ऑलराउंडर्स शाकिब अल हसन और मेहदी हसन मिराज का खेलना लगभग तय है। टीम तेज गेंदबाज नाहिद राणा की जगह तीसरा स्पिनर तैजुल इस्लाम को शामिल कर सकती है।दूसरे मुकाबले के लिए महमुदुल हसन जॉय, नाहिद राणा, नईम हसन, सैयद खालिद अहमद और जाकिर अली अनिक बाहर बैठ सकते हैं।

 

OpenAI की CTO मीरा मुराती ने इस्तीफा दिया:दो और टेक्निकल लीडर्स ने छोड़ी कंपनी, ऑल्टमैन बोले- हर चीज के लिए धन्यवाद मीरा

चैटजीपीटी को बनाने वाली कंपनी OpenAI के टॉप 3 टेक्निकल लीडर्स ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इसमें चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर मीरा मुराती, वाइस प्रेसिडेंट-रिसर्च बैरेट जोफ और चीफ रिसर्च ऑफिसर बॉब मैकग्रे शामिल हैं। मुराती ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म X पर अपने इस्तीफे के बारे में जानकारी दी।

मीरा मुराती ने X पर लिखा- मेरे पास आपके साथ शेयर करने के लिए कुछ है। बहुत विचार-विमर्श के बाद, मैंने OpenAl को छोड़ने का कठिन निर्णय लिया है। OpenAl टीम के साथ मेरे साढ़े 6 साल एक एक्स्ट्राऑर्डिनरी प्रिविलेज रहे हैं। मैं इसलिए पद छोड़ रही हूं क्योंकि मैं अपने खुद के एक्सप्लोरेशन के लिए टाइम और स्पेस क्रिएट करना चाहती हूं।

ऑल्टमैन बोले – हर चीज के लिए धन्यवाद मीरा

फो फाउंडर ऑल्टमैन ने मीरा मुराती के पोस्ट पर रिप्लाई करते हुए लिखा- हर चीज के लिए धन्यवाद मीरा। यह कहना मुश्किल है कि मीरा OpenAI, हमारे मिशन और व्यक्तिगत रूप से हम सभी के लिए कितना मायने रखती है। मैं इसके लिए उत्साहित हूं कि वह आगे क्या करेगी। हम जल्द ही परिवर्तन योजनाओं के बारे में और अधिक बताएंगे।

OpenAI की अंतरिम CEO भी रह चुकी हैं मीरा मुराती

नवंबर 2023 में जब OpenAI बोर्ड ने सैम ऑल्टमैन को कंपनी के CEO पद से हटाने का निर्णय लिया था, तब मुराती को कंपनी के अंतरिम CEO के रूप में नियुक्त किया गया था। OpenAI में 2018 में शामिल होने से पहले उन्होंने 2012 से 2013 जोडियक एयरोस्पेस में और कुछ समय टेस्ला में भी काम किया है। अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 2011 में इंटर्न के तौर पर गोल्डमैन सैक्स में की थी।

2022 में ChatGPT को पब्लिकली अनवील किया था

OpenAI ने नवंबर 2022 में दुनिया के लिए ChatGPT अनवील किया था। इस AI टूल ने तेजी से लोकप्रियता हासिल की है। म्यूजिक और पोएट्री लिखने से लेकर निबंध लिखने तक, ChatGPT बहुत सारे काम कर सकता है। यह एक कन्वर्सेशनल AI है। एक ऐसा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जो आपको इंसानों की तरह जवाब देता है।

OpenAI में माइक्रोसॉफ्ट जैसी बिग टेक कंपनी ने 13 बिलियन डॉलर से ज्यादा का निवेश कर रखा है। कंपनी ने अपने सर्च इंजन ‘बिंग’ में भी ChatGPT को इंटीग्रेट किया है। और भी कई कंपनियां ChatGPT का इस्तेमाल करने के लिए आतुर हैं। ऐसे में AI बेस्ड इस चैटबॉट का इस्तेमाल आने वाले दिनों में कहीं ज्यादा फैलने की उम्मीद है।

आलोचकों का कहना है कि AI का बढ़ता इस्तेमाल लोगों के लिए मुश्किलें पैदा करेगा। नौकरियां खत्म होंगी, लोगों की इस पर निर्भरता बढ़ती जाएगी और शायद एक दिन ऐसा भी आए कि इंसान सोचने का काम पूरी तरह AI पर छोड़ दे। सैम ऑल्टमैन इस खतरे को नकारते नहीं हैं। हालांकि, वो कहते हैं कि इंसानी दिमाग की जरूरत ही न पड़े ऐसी दुनिया की कल्पना मुश्किल है।

ChatGPT पर आप किस तरह के सवाल पूछ सकते हैं?

इससे आप कोई भी सवाल पूछ सकते हैं। यानी ईमेल लिखने से लेकर CV तक आप इससे बनवा सकते हैं। रील या अपनी वीडियो कैसे वायरल करना है, इसका भी जवाब ChatGPT देता है। वाइफ को क्या गिफ्ट दें, इस पर भी ChatGPT आपको सुझाव देता है।

ChatGPT लंबे जवाब की बजाय छोटे और सटीक शब्दों पूरी जानकारी देता है। किसी स्टूडेंट को डेमोक्रेसी पर एसे यानी निबंध लिखना है तो वह तुरंत ChatGPT पर टाइप करेगा Write an essay on democracy। इसके बाद आपके सामने पूरा एसे लिखा हुआ आ जाएगा।

 

पुतिन ने पश्चिमी देशों को न्यूक्लियर हमले की चेतावनी दी:बोले- परमाणु नीति में बदलाव करेंगे, रूस को बचाने के लिए ये जरूरी

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने एक बार फिर से पश्चिम देशों को परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की धमकी दी है। BBC की रिपोर्ट के मुताबिक, पुतिन ने राजधानी मॉस्को में बुधवार को सुरक्षा परिषद की तत्काल बैठक बुलाई थी। इसमें उन्होंने कहा कि सरकार परमाणु हथियारों के इस्तेमाल से जुड़े नियम और शर्तों को बदलने जा रही है।

पुतिन ने कहा कि देश के परमाणु नियमों में कई नई चीजें जोड़ी जाएंगी। इसमें रूस के खिलाफ मिसाइल या फिर ड्रोन हमलों के खिलाफ परमाणु हथियारों का इस्तेमाल भी शामिल है। अगर रूसी इलाके में बड़े पैमाने पर मिसाइल या ड्रोन हमला होता है, जिससे देश की संप्रभुता पर गंभीर खतरा आ सकता है, तब भी रूस परमाणु हथियारों का इस्तेमाल कर सकता है।

रूसी राष्ट्रपति ने ये भी कहा कि यदि कोई गैर-परमाणु संपन्न देश किसी परमाणु संपन्न देश के समर्थन से रूस पर हमला करता है तो इसे दोनों देशों की तरफ से किया गया हमला माना जाएगा। उन्होंने कहा कि रूस के परमाणु हथियार, देश और उसके नागरिकों की सुरक्षा की सबसे बड़ी गारंटी हैं।

राष्ट्रपति पुतिन ने बुधवार को परमाणु नीति पर चर्चा के लिए मॉस्को में सुरक्षा परिषद के साथ बैठक की थी।
राष्ट्रपति पुतिन ने बुधवार को परमाणु नीति पर चर्चा के लिए मॉस्को में सुरक्षा परिषद के साथ बैठक की थी।

पुतिन बोले- परमाणु नीति में बदलाव समय की मांग पुतिन का ये बयान तब आया है, जब यूक्रेन पश्चिमी देशों से रूस में दूर तक हमला करने वाली मिसाइलों के इस्तेमाल की इजाजत मांग रहा है। पुतिन ने कहा कि परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की शर्तों में बदलाव जरूरी था, क्योंकि दुनिया तेजी से बदल रही है।

यूक्रेन को ब्रिटेन ने स्टॉर्म शैडो, अमेरिका ने आर्मी टैक्टिकल मिसाइल सिस्टम (ATACMS) मिसाइलें दी हुई हैं। ये लंबी दूरी की घातक मिसाइलें हैं, जो करीब 300 किमी तक सटीक निशाना लगा सकती हैं।

यूक्रेन इन मिसाइलों का इस्तेमाल रूस में नहीं, बल्कि सिर्फ अपनी सीमा के भीतर ही कर सकता है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की चाहते हैं कि इन प्रतिबंधों को हटाया जाए, ताकि वे रूस के भीतर लंबी दूरी के हथियारों का इस्तेमाल कर सकें।

जेलेंस्की इस समय अमेरिका दौरे पर हैं। वे बाइडेन से रूस में लंबी दूरी के मिसाइल दागने की अनुमति मांग सकते हैं।
जेलेंस्की इस समय अमेरिका दौरे पर हैं। वे बाइडेन से रूस में लंबी दूरी के मिसाइल दागने की अनुमति मांग सकते हैं।

बाइडेन से आज मिलेंगे जेलेंस्की यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की इस समय अमेरिका के दौरे पर हैं। वे गुरुवार को अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन से मुलाकात करने वाले हैं। इस दौरान वे रूस में लंबी दूरी की मिसाइलों के इस्तेमाल की अनुमति मांग सकते हैं।

यह पहली बार नहीं है, जब पुतिन ने पश्चिमी देशों को परमाणु युद्ध की धमकी दी हो। रूसी राष्ट्रपति ने 12 सितंबर को कहा था कि अगर पश्चिमी देश यूक्रेन को क्रूज मिसाइल के इस्तेमाल की अनुमति देते हैं तो इसका मतलब यह समझा जाएगा कि NATO, रूस के खिलाफ जंग में उतर चुका है। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा होता है तो वे इसका जवाब जरूर देंगे।

यूक्रेन ढाई साल से अमेरिका और पश्चिमी देशों के समर्थन से रूस के खिलाफ जंग लड़ रहा है। यूक्रेन ने अगस्त में रूस में घुस कर उसके कई इलाकों पर कब्जा कर लिया था। रूस अपने इलाकों को छुड़ाने की कोशिश में जुटा है।

ऑनलाइन गेम की लत ने लिया 12 लाख का कर्ज, मोहम्मद कौसर की जिंदगी में आया संकट

बिहार के मोहम्मद कौसर, जिनकी उम्र अभी 25 साल है, मोबाइल गेम की लत के कारण बड़े आर्थिक संकट में फंस गए हैं। शुरुआत में यह शौक सिर्फ मनोरंजन के लिए था, लेकिन धीरे-धीरे यह एक गंभीर लत बन गया। लूडो जैसे ऑनलाइन गेम्स पर छोटी रकम से शुरू हुआ यह खेल आज मोहम्मद कौसर को 12 लाख रुपए के कर्ज में डुबो चुका है।

कैसे शुरू हुई लत?

कौसर ने शुरुआत में केवल 50-100 रुपए के दांव से खेलना शुरू किया। लेकिन जैसे-जैसे जीतने की उम्मीद और लालच बढ़ता गया, उन्होंने अपनी जमा-पूंजी तक गंवा दी। जब भी वे हारते, उन्हें लगता कि अगली बार वे यह नुकसान पूरा कर लेंगे, लेकिन हर बार हार उनके हिस्से आई। इस बीच, आर्थिक बोझ बढ़ता गया और उन्हें अपनी जमीन तक बेचनी पड़ी। यहाँ तक कि बाकी सामान भी गिरवी रखना पड़ा, लेकिन 12 लाख का कर्ज बढ़ता गया।

समस्या सिर्फ कौसर की नहीं है

यह समस्या सिर्फ मोहम्मद कौसर तक सीमित नहीं है। उनके इलाके में और भी कई युवा इस ऑनलाइन गेम की लत के शिकार हो चुके हैं। लूडो जैसे सरल दिखने वाले गेम ने उन्हें आर्थिक संकट में डाल दिया है। मोहम्मद कौसर के बस्ती और कॉलोनी के कई युवा भी इसी तरह अपने पैसे और भविष्य को इस लत में गंवा रहे हैं।

प्रशासन और पुलिस की असमर्थता

मोहम्मद कौसर ने प्रशासन और पुलिस से मदद की गुहार लगाई, लेकिन उन्हें कोई ठोस सहयोग नहीं मिला। ऑनलाइन गेम्स और इस प्रकार के फ्रॉड से जुड़ी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है, जिसके कारण कौसर जैसे लोग अपनी शिकायतें लेकर इधर-उधर भटक रहे हैं। उनका कहना है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर ऐसे गेम्स के बढ़ते प्रचार को रोकना चाहिए, जो युवा पीढ़ी को आर्थिक और मानसिक रूप से बर्बाद कर रहे हैं।

सोशल मीडिया पर आवाज उठाने की कोशिश

कौसर अब सोशल मीडिया के जरिए अपनी बात दुनिया के सामने लाना चाहते हैं ताकि अन्य लोग इस तरह के फ्रॉड का शिकार न हों। उन्होंने अपील की है कि इस मुद्दे पर जागरूकता फैलानी चाहिए और प्रशासन को ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। उनका कहना है, “यह सिर्फ मेरे साथ ही नहीं हो रहा, और भी कई लोग इससे प्रभावित हो रहे हैं। मैं चाहता हूं कि इस समस्या को गंभीरता से लिया जाए और इसे रोका जाए।”

आर्थिक संकट से मानसिक संकट तक

कर्ज के बोझ तले दबे मोहम्मद कौसर न केवल आर्थिक रूप से परेशान हैं, बल्कि मानसिक रूप से भी भारी तनाव में हैं। उन्हें समझ नहीं आ रहा कि वे इस संकट से कैसे उबर पाएंगे। ऑनलाइन गेम की लत ने उनके जीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है और वह दूसरों को इस जाल में फंसने से रोकने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।

समाधान की ओर एक कदम

इस मुद्दे पर ध्यान देने की जरूरत है ताकि ऑनलाइन गेम्स और उनसे जुड़े फ्रॉड पर नियंत्रण किया जा सके। प्रशासन और समाज को मिलकर ऐसे मामलों में सक्रियता से काम करना चाहिए ताकि अन्य युवाओं को इस खतरनाक लत से बचाया जा सके।

यह कहानी सिर्फ मोहम्मद कौसर की नहीं है, बल्कि उन सभी युवाओं की है जो ऑनलाइन गेम्स की लत के शिकार हो रहे हैं। समाज को इस दिशा में कदम उठाने की जरूरत है ताकि कौसर और उनके जैसे अन्य लोग इस चक्रव्यूह से बाहर निकल सकें।

17 वर्षों से अपने हक की लड़ाई लड़ रहे चंद्र प्रसाद मीडिया और प्रशासन से मांगी मदद की गुहार

नमस्कार दोस्तों, ई खबर में आपका स्वागत है आज हम आपके सामने एक महत्वपूर्ण मुद्दा लेकर आए हैं, जो हमारे समाज की असंवेदनशीलता और सरकारी तंत्र की उदासीनता को दर्शाता है। यह कहानी है चंद्र प्रसाद की, जो दिल्ली के गांव घोगा के निवासी हैं। चंद्र प्रसाद लगातार 17 वर्षों से अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं। उनके पिता, स्वर्गीय श्री हेम लाल, शिक्षा विभाग में चौकीदार के रूप में कार्यरत थे, जिनका 28 जनवरी 2007 को निधन हो गया। अपने पिता के निधन के बाद से, चंद्र प्रसाद ने करुणामूलक आधार पर सरकारी नौकरी के लिए आवेदन किया, लेकिन आज तक उन्हें न्याय नहीं मिला है।

चंद्र प्रसाद ने 2018 में अदालत का दरवाजा खटखटाया, और उन्हें अदालत से उनके पक्ष में फैसला भी मिला। आदेश संख्या (OA No. 797/2018, MA No. 868/2018) के अनुसार, उन्हें नौकरी देने का निर्देश दिया गया था। लेकिन दुर्भाग्य से, आज तक उस आदेश पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। यह हमारी न्याय प्रणाली और सरकारी विभागों की निष्क्रियता को उजागर करता है।

चंद्र प्रसाद की मां बीमार हैं, घर की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है, और उनके पास कोई स्थायी आय का स्रोत नहीं है। ऐसे में, वह दिल्ली सरकार और शिक्षा निदेशक से मदद की अपील कर रहे हैं कि उन्हें जल्द से जल्द करुणामूलक आधार पर नौकरी दी जाए, ताकि वह अपने परिवार का भरण-पोषण कर सकें। चंद्र प्रसाद ने मीडिया के माध्यम से मुख्यमंत्री से भी गुहार लगाई है कि वह उनके मामले में हस्तक्षेप करें और उन्हें न्याय दिलाएं।

आशा करते हैं कि सरकार और प्रशासन इस मुद्दे पर गंभीरता से ध्यान देंगे, और चंद्र प्रसाद जैसे पीड़ितों को उनका हक दिलाएंगे। धन्यवाद।