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Sunday, January 25, 2026
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गोविंदा के पैर में गोली लगी:खुद से मिस फायरिंग हुई, हॉस्पिटल से ऑडियो मैसेज में एक्टर बोले- गोली निकाल दी गई

बॉलीवुड एक्टर गोविंदा (60) पैर में गोली लगने से घायल हो गए हैं। उन्हें खुद की पिस्टल से चली गोली लगी। घटना मंगलवार सुबह करीब 4.45 बजे की है। ऑपरेशन कर उनके पैर से गोली निकाल ली गई है। एक्टर फिलहाल खतरे से बाहर हैं।

गोविंदा खतरे से बाहर
जानकारी के मुताबिक, गोली लगने से उनके पैर से काफी खून बह गया था। इलाज के लिए अंधेरी के क्रिटी केयर हॉस्पिटल में भर्ती किया गया है। हॉस्पिटल से जुड़े सुत्रों के अनुसार, शुरुआती इलाज के बाद अब गोविंदा खतरे से बाहर हैं। उनकी पत्नी सुनीता फिलहाल अस्पताल में उनके साथ मौजूद हैं।

एक प्रोग्राम में शामिल होने कोलकाता रवाना होने वाले थे
गोविंदा के मैनेजर शशि सिन्हा ने बताया है कि वे एक प्रोग्राम के लिए कोलकाता जा रहे थे। 6 बजे की फ्लाइट थी। अलमारी में पिस्टल रखते हुए मिस फायरिंग हो गई और उनके घुटने के नीचे गोली लग गई। उन्हें तुरंत अंधेरी के अस्पताल ले जाया गया। गोली निकाल ली गई है। उनकी हालत खतरे से बाहर है। घबराने की कोई बात नहीं है।
कुली नंबर 1, हीरो नंबर 1, राजा बाबू, छोटे सरकार, हद कर दी आपने जैसी फिल्मों का हिस्सा रहे गोविंदा बीते 5 सालों से फिल्मों से दूर हैं। उनकी आखिरी रिलीज फिल्म 2019 की रंगीला राजा है।
गोविंदा 28 मार्च को शिवसेना (शिंदे गुट) में शामिल हुए थे। इस दौरान महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे भी मौजूद थे। पार्टी जॉइन करने के बाद गोविंदा ने कहा था- मैं 2004 से 2009 तक राजनीति में था। ये संयोग है कि 14 साल बाद मैं फिर से राजनीति में आया हूं। मुझ पर जो विश्वास किया गया है, मैं उसे पूरी तरह से निभाऊंगा।

गोविंदा ने 2004 में कांग्रेस के टिकट पर मुंबई नॉर्थ से लोकसभा चुनाव लड़ा था। उन्होंने भाजपा के राम नाइक को 48,271 वोटों से हराया था। एक्टर 2004 से 2009 तक सांसद रहे थे।
अपनी फिल्मों से अक्सर सबको हंसाने वाले गोविंदा ने रियल लाइफ में बेहद ट्रैजिक समय भी देखा है।साल 2014 में दिए एक इंटरव्यू में एक्टर ने बताया था कि उन्होंने अपने परिवार में 11 मेंबर्स की डेथ देखी है। गोविंदा के अनुसार वो दौर उनकी लाइफ का सबसे चैलेंजिंग और इमोशनली तोड़ देने वाला समय था।
गोविंदा का फिल्मी करियर इस समय ढलान पर है। उनकी पिछली फिल्म ‘रंगीला राजा’ 2019 में आई थी जो कि फ्लॉप रही। इसके बाद गोविंदा के पास कोई फिल्म नहीं है। कभी पहली फिल्म हिट होने के बाद गोविंदा ने एक साथ 49 फिल्में साइन कर ली थीं।

दुनिया का ये शहर तोतों से लड़ रहा ‘जंग’, पास की पहाड़ी से आए हजारों पक्षी, बार-बार अंधेरे में डूब रहा इलाका

ब्यूनस एयर्स: अर्जेंटीना के पूर्वी अटलांटिक तट के पास बसा हिलारियो एस्कासुबी शहर बीते कुछ समय से एक अलग तरह की परेशानी का सामना कर रहा है। ये परेशानी शहर में बड़ी तादाद में तोतों के आने की वजह से हुई है। हजारों की तादाद में तोते जंगल से शहर में आ गए है, जो गंदगी फैलाकर, आवाज करके और तार काटकर आम लोगों की जिंदगी मुश्किल बना रहे हैं। शहर के पास के वनों की अंधाधुंध कटाई के चलते हरे, पीले और रंग के ये पक्षी हजारों की तादाद में शहर में आए हैं।
तोतों का झुंड बिजली के तारों को काट देते हैं, जिससे बिजली गुल हो जाती है तो कभी फोन और इंटरनेट के तारों को अलग कर देते हैं। इससे रोज शहर में कोई ना कोई परेशानी खड़ी होती रहती है। स्थानीय पत्रकार रामोन अल्वारेज का कहना है कि तोते किसी ना किसी तरह से दैनिक जीवन में कई तरह की परेशानियां खड़ी कर रहे हैं।
तोतों को भगाने की कोशिश नाकाम
रामोन के मुताबिक, तोतों को डराने और भगाने का लिए स्थानीय निवासियों ने कई तरह के तरीके अपनाएं हैं। तोतों को डराने वाली आवाज और लेजर लाइट का इस्तेमाल कर इन्हें भगाने की कोशिश की गई लेकिन ये सभी तरकीबें फेल साबित हुई हैं। लोगों की रोजाना की जिंदगी में तोतों की वजह से परेशानियां बढ़ती ही जा रही हैं।
जीवविज्ञानियों के अनुसार, आसपास की पहाड़ियों में दूर तक वन फैले हुए थें। इन वनों में ये पक्षी बहुत बड़ी तादाद में वर्षों से रहते आए हैं। हालिया वर्षों में वनों की कटाई ने इन रंग बिरंगे पक्षियों को बेघर कर दिया है। अर्जेंटीना में वन गायब हो रहे हैं तो ये भोजन-पानी और आश्रय की तलाश में करीबी शहरों में पहुंच रहे हैं।
वनों को बचाने से दूर होगी परेशानी
जीवविज्ञानी डायना लेरा कहती हैं कि पिछले कुछ वर्षों में तोतों का शहर की तरफ आना बहुत तेज हुआ है। खासतौर से सर्दियों के दौरान ये शरण की तलाश में शहर में आते हैं। स्थानीय लोगों के लिए तोतों का ये झुंड परेशानी का सबब भी बनते हैं लेकिन हमें ये समझने की जरूरत है भगाने से ये नहीं जाएंगे क्योंकि इनके घर तोड़ दिए गए हैं।
लैरा कहती हैं कि हमें अपने प्राकृतिक वातावरण को बहाल करने की शुरुआत करने की जरूरत है। हमें उन रणनीतियों के बारे में सोचना होगा, जिसने किसी विकास के नाम पर पशु पक्षियों के घर ना छीने जाएं। इससे ही इस तरह की समस्याओं का स्थायी हल निकल सकेगा।

सेहतनामा- आलिया भट्ट को 6 घंटे तक यूरिन रोकनी पड़ी:पेशाब रोकने से बढ़ता यूटीआई, किडनी स्टोन्स का रिस्क, बता रहे यूरोलॉजिस्ट

बॉलीवुड एक्ट्रेस आलिया भट्ट ‘द ग्रेट इंडियन कपिल शो’ के दूसरे सीजन में अपनी फिल्म ‘जिगरा’ के प्रमोशन के लिए आई थीं। वहां उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले पेरिस फैशन वीक में उन्हें 6 घंटे तक यूरिन रोककर रखनी पड़ी। असल में उन्होंने इस दौरान एक साड़ी पहनी थी, जो 23 फीट लंबी थी। इसे पहनकर वह वॉशरूम नहीं जा सकती थीं।

ऐसे में सवाल उठता है कि अगर कोई 6 घंटे तक यूरिन रोककर रखता है तो इसके क्या परिणाम हो सकते हैं? क्या इससे सेहत को कोई नुकसान हो सकता है?

आमतौर पर डॉक्टर्स लगभग हर तीन घंटे में एक बार यूरिन रिलीज करने की सलाह देते हैं, लेकिन कई बार ऐसी परिस्थितियां बन जाती हैं कि यूरिन रोककर रखना हमारी मजबूरी हो जाती है। नेताओं, एथलीट्स और कॉन्सर्ट में लाइव परफॉर्मेंस देने वाले एक्टर्स और सिंगर्स को अक्सर कई घंटों के लिए य़ूरिन रोककर रखना पड़ता है।

हमारे देश में यह एक गंभीर समस्या है। पुरुष तो राह चलते गाड़ी रोककर कहीं भी यूरिन पास कर लेते हैं, जबकि महिलाओं को कई बार अपने ही घर में यूरिन रोककर रखना पड़ता है। अगर घर पर मेहमान आए हैं और वॉशरूम का रास्ता उनके सामने से होकर जाता है तो महिलाएं संकोच के कारण कई घंटे तक वॉशरूम इस्तेमाल नहीं कर पाती हैं। यह संकोच उनका खुद का बनाया नहीं है, अगर वो इस बीच वॉशरूम चली जाएं तो निर्लज्जता का टैग मुफ्त में मिल जाएगा। यह बात सिर्फ गप्प नहीं है, मैंने खुद अपने घर में मम्मी और दीदी के बीच इस संकोच को देखा है। इसके कारण उन्हें यूटीआई इन्फेक्शन और किडनी स्टोन्स की समस्याएं भी हुईं।

इसलिए आज ‘सेहतनामा’ में आपको बताएंगे कि कोई कितनी देर तक यूरिन रोक सकता है। साथ ही जानेंगे कि-

क्या उम्र के साथ यूरिनरी ब्लैडर का आकार बदलता है?
ज्यादा देर तक यूरिन रोकने के क्या खतरे हैं?
क्या ज्यादा देर यूरिन रोकने से मौत हो सकती है?
स्वस्थ रहने के लिए कितनी देर में यूरिन पास करना जरूरी है

ज्यादातर लोग हर 24 घंटे में 6-7 बार यूरिन पास करते हैं। अगर कोई व्यक्ति दिन में 4 से 10 बार यूरिन पास कर रहा है और उसकी जिंदगी इससे प्रभावित नहीं हो रही है तो इसे हेल्दी माना जा सकता है। डॉक्टर एक स्वस्थ वयस्क व्यक्ति को लगभग हर 3 घंटे में एक बार यूरिन पास करने की सलाह देते हैं। यह फ्रीक्वेंसी उम्र के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है क्योंकि उम्र के हिसाब से यूरिनरी ब्लैडर का आकार भी बदलता है। यह इस पर भी निर्भर करता है कि कोई दिन भर में कितनी मात्रा में लिक्विड कंज्यूम कर रहा है।
इसका मतलब है कि एक स्वस्थ वयस्क व्यक्ति ब्लैडर में 300-400 मिलीलीटर लिक्विड स्टोर कर सकता है। जरूरत पड़ने पर इसका आकार बढ़ भी जाता है, लेकिन उसके कारण दर्द, असुविधा और इन्फेक्शन का सामना करना पड़ता है।

आमतौर पर जब हमारा ब्लैडर आधे से थोड़ा अधिक भर जाता है तो यह हमें यूरिन रिलीज करने के लिए इशारा करने लगता है। यह नेचुरल कॉल है। इसलिए हम जितनी बार ब्लैडर के इस इशारे को इग्नोर करते हैं, खुद को उतना ही समस्याओं के नजदीक ले जाते हैं।

ज्यादा देर तक यूरिन रोककर रखने से क्या समस्याएं हो सकती हैं

आमतौर पर अगर एक स्वस्थ व्यक्ति कभी-कभार कुछ घंटों के लिए यूरिन को रोक रहा है तो इससे कोई समस्या नहीं होती है।
अगर पहले से यूरिनरी ट्रैक्ट, ब्लैडर या किडनी में कोई शिकायत है तो समस्या बढ़ सकती है।
अगर कोई स्वस्थ व्यक्ति अक्सर यूरिन रोककर रखता है तो उसे कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं।
दर्द और असहजता होती है

अगर कोई नियमित रूप से या अक्सर पेशाब करने की इच्छा को देर तक नजरअंदाज करता रहता है तो उसे यूरिनरी ब्लैडर या किडनी में दर्द हो सकता है। अजीब असहजता वाली स्थिति बन सकती है। यूरिन रिलीज करने में भी दर्द हो सकता है। इसके बाद भी कई बार मसल्स में सिकुड़न रह जाती है, जिससे पेल्विक एरिया में ऐंठन हो सकती है।

यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन हो सकता है

कई बार बहुत देर तक पेशाब रोककर रखने से बैक्टीरिया पनप सकते हैं। इससे यूरिनरी ट्रैक्ट में इन्फेक्शन (UTI) हो सकता है।

यही कारण है कि डॉक्टर लंबे समय तक पेशाब रोकने से बचने की सलाह देते हैं क्योंकि इससे यूटीआई का खतरा बढ़ सकता है। उन लोगों को इसका खतरा और अधिक होता हैै, जिन्हें पहले कभी यूटीआई की समस्या हुई है।

अगर कोई पर्याप्त मात्रा में पानी और अन्य लिक्विड्स नहीं पी रहा है तो उसे भी यूटीआई विकसित होने की संभावना अधिक होती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि लिक्विड्स के बिना पेशाब करने की इच्छा नहीं पैदा होगी। इससे यूरिनरी ट्रैक्ट में बैक्टीरिया फैल सकते हैं और संक्रमण हो सकता है।
यूरिनरी ब्लैडर में खिंचाव हो सकता है

अगर कोई शख्स नियमित रूप से कई दिन तक बार-बार पेशाब रोक रहा है तो यूरिनरी ब्लैडर में खिंचाव हो सकता है। इससे ब्लैडर की प्राकृतिक रूप से विस्तार करने और सिकुड़ने की क्षमता कमजोर हो जाएगी, जिसके चलते यूरिन रिलीज करने में समस्या होगी या कई बार यह असंभव भी हो सकता है।

अगर किसी व्यक्ति का ब्लैडर खिंचाव आने से बहुत फैल गया है तो उसे आराम देने के लिए कैथेटर यानी कृत्रिम पेशाब नली (यूरिन पाइप) की जरूरत हो सकती है।

पेल्विक मसल्स डैमेज हो सकती हैं

बार-बार पेशाब रोकने से पेल्विक क्षेत्र की मांसपेशियों को नुकसान हो सकता है। इनमें से कुछ मसल्स का काम है यूरिन को रोककर रखना। अगर यह डैमेज होती हैं तो यूरिन थोड़ी देर रोककर रख पाना मुश्किल हो जाएगा।

कीगल्स एक्सरसाइज करके पेल्विक फ्लोर की इन मसल्स को मजबूत किया जा सकता है।
इससे मसल्स को हुए इस नुकसान की मरम्मत करने में मदद मिल सकती है।
किडनी स्टोन हो सकते हैं

नियमित रूप से ज्यादा देर तक यूरिन को रोकने से उन लोगों को किडनी स्टोन्स हो सकते हैं, जिन्हें कभी स्टोन्स रहे हैं या जिनके यूरिन में मिनरल्स की मात्रा अधिक है। यूरिन में अक्सर यूरिक एसिड और कैल्शियम ऑक्जेलेट जैसे मिनरल्स होते हैं।

क्या ज्यादा देर तक यूरिन रोकने से मौत हो सकती है

आमतौर पर यूरिन रोकने से मृत्यु की आशंका न के बराबर होती है, लेकिन इससे कारण हुए इन्फेक्शन को नहीं रोका गया तो ये मौत का कारण बन सकते हैं।
अगर कोई बहुत लंबे समय तक पेशाब रोककर रखता है तो क्षमता पार होने पर शरीर खुद ही ब्लैडर से अपना कंट्रोल खत्म कर देता है। इससे न चाहते हुए भी यूरिन पास हो जाता है।
कुछ रेयर मामलों में ऐसा भी हो सकता है कि ज्यादा देर तक यूरिन रोककर रखने के कारण ब्लैडर पर दबाव बढ़े और यह फट जाए। ऐसी कंडीशन में तुरंत मेडिकल हेल्प की जरूरत होती है। यह घातक स्थिति होती है।
इसलिए समय पर पानी पीना जितना जरूरी है, यूरिन को भी समय पर रिलीज करना उतना ही जरूरी है।

सोना ₹200 बढ़कर ₹75,397 पर पहुंचा:चांदी ₹838 महंगी होकर ₹90,238 प्रति किलो बिक रही, कैरेट के हिसाब से देखें गोल्ड की कीमत

सोने-चांदी की कीमत में आज (1 अक्टूबर) मंगलवार को तेजी देखने को मिली है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का भाव 200 रुपए बढ़कर 75,397 रुपए पर पहुंच गया है। इससे पहले इसके दाम 75,197 रुपए प्रति दस ग्राम थे।

वहीं चांदी की कीमत में भी आज तेजी है। ये 838 रुपए बढ़कर 90,238 रुपए प्रति किलो हो गई है। इससे पहले चांदी 89,400 रुपए पर थी। इस साल चांदी 29 मई को अपने ऑल टाइम हाई 94,280 रुपए प्रति किलो पर पहुंच चुकी है। वहीं सोने ने 26 सितंबर को 75,750 रुपए का हाई बनाया था।
4 महानगरों और भोपाल में सोने की कीमत

दिल्ली : 10 ग्राम 22 कैरेट सोने की कीमत 70,650 रुपए और 10 ग्राम 24 कैरेट सोने की कीमत 77,060 रुपए है।
मुंबई : 10 ग्राम 22 कैरेट सोने की कीमत 70,500 रुपए और 10 ग्राम 24 कैरेट सोने की कीमत 76,910 रुपए है।
कोलकाता : 10 ग्राम 22 कैरेट गोल्ड की कीमत 70,500 रुपए और 24 कैरेट 10 ग्राम सोने की कीमत 76,910 रुपए है।
चेन्नई : 10 ग्राम 22 कैरेट सोने की कीमत 70,500 रुपए और 10 ग्राम 24 कैरेट सोने की कीमत 76,910 रुपए है।
भोपाल : 10 ग्राम 22 कैरेट सोने की कीमत 70,550 रुपए और 10 ग्राम 24 कैरेट सोने की कीमत 76,960 रुपए है।
सोना खरीदते समय इन 3 बातों का रखें ध्यान

1. सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें। सोने पर 6 अंकों का हॉलमार्क कोड रहता है। इसे हॉलमार्क यूनीक आइडेंटिफिकेशन नंबर यानी HUID कहते हैं। ये नंबर अल्फान्यूमेरिक यानी कुछ इस तरह होता है- AZ4524। हॉलमार्किंग के जरिए ये पता करना संभव है कि कोई सोना कितने कैरेट का है।

2. कीमत क्रॉस चेक करें सोने का सही वजन और खरीदने के दिन उसकी कीमत कई सोर्सेज (जैसे इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट) से क्रॉस चेक करें। सोने का भाव 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट के हिसाब से अलग-अलग होता है। 24 कैरेट सोने को सबसे शुद्ध सोना माना गया है, लेकिन इसकी ज्वेलरी नहीं बनती, क्‍योंकि वो बेहद मुलायम होता है।

3. कैश पेमेंट न करें, बिल लें सोना खरीदते वक्त कैश पेमेंट की जगह UPI (जैसे भीम ऐप) और डिजिटल बैंकिंग के जरिए पेमेंट करना अच्छा रहता है। आप चाहें तो डेबिट या क्रेडिट कार्ड के माध्यम से भी पेमेंट कर सकते हैं। इसके बाद बिल लेना न भूलें। यदि ऑनलाइन ऑर्डर किया है तो पैकेजिंग जरूर चेक करें।

मणिपुर में नहीं हुआ बम ड्रोन का इस्तेमाल, न ही आए हथियारबंद घुसपैठी… आर्मी चीफ ने दिया बड़ा अपडेट

नई दिल्ली : मणिपुर की स्थिति को लेकर आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा वहां स्थिति स्टेबल है लेकिन तनावपूर्ण है। उन्होंने कहा कि भरोसा फिर से कायम करने में वक्त लगेगा। आर्मी चीफ ने साफ किया कि मणिपुर में न तो बॉम ड्रोन का इस्तेमाल हुआ और न ही हथियारबंद घुसपैठी घुसे हैं। उन्होंने कहा कि वहां नेरेटिव की लड़ाई चल रही है और हम कोशिश कर रहे हैं कि गलत नेरेटिव ना बने।
मणिपुर में स्थिति स्टेबल लेकिन तनावपूर्ण
आर्मी चीफ ने कहा कि मणिपुर में जो पिछले साल शुरू हुआ वह एक अफवाह से शुरु हुआ था, जिससे हिंसा फैली। यह नेरेटिव की लड़ाई हो गई और कम्युनिटी के बीच पोलराइजेशन हुआ। उन्होंने कहा कि वहां स्थिति स्टेबल है लेकिन तनावपूर्ण है। उन्होंने कहा कि आतंरिक तौर पर भी 60 हजार से ज्यादा लोग विस्थापित हुए, वह संख्या अब 40 हजार से कम आ गई है। हथियार लूटे गए, महिलाओं की अगुवाई में संगठन, अंडग्राउंड संगठन सामने आए जिससे लड़ाई मुश्किल हुई।
जनरल द्विवेदी ने कहा कि हमने वहां आर्मी और असम राइफल्स के करीब 126 कॉलम तैनात किए है। हम भरोसा फिर से पैदा करने की कोशिश कर रहे है, इसमें वक्त लगेगा। उन्होंने कहा कि जो हथियार लूटे गए थे उससे हमने 25 पर्सेंट हथियार रिकवर किए हैँ। इससे ज्यादा लोकल टाइप वेपन रिकवर किए हैं। हम वहां पूर्व सैनिकों की सलाह भी ले रहे हैं।
न बम ड्रोन न घुसपैठी
आर्मी चीफ ने कहाकि हमें गलत नेरेटिव नहीं बनने देना है, जिसकी हम कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बॉम ड्रोन की बात आई लेकिन ग्राउंड पर हमने देखा ऐसा कुछ नहीं था। यह नेरेटिव बना कि 900 एंटीनैशनल एल्टीमेंट घुस आए हैं लेकिन ऐसा कुछ नहीं था। अगर हम यह कंट्रोल करें तो चीजें ठीक हो जाएंगी। म्यामांर से आ रहे घुसपैठियों की चर्चाओं के बीच आर्मी चीफ ने साफ किया कि म्यांमार में भी दिक्कत चल रही हैं और वहां से भी लोग ऐसी जगह जा रहे हैं जहां शांति हो और लोग उन्हें स्वीकार कर लें। तो वे मिजोरम और मणिपुर में आ रहे हैं। जो आ रहे हैं वह अनआर्म्ड आ रहे हैं और शेल्टर के लिए आ रहे हैं।
थिएटराइजेशन को लेकर सब एकमत
आर्मी, नेवी और एयरफोर्स को मिलाकर थिएटर कमांड बनाने की थिएटराइजेशन की प्रक्रिया पर आर्मी चीफ ने कहा कि इसे लेकर तीनों चीफ एकमत हैं और सीडीएस इसे लीडरशिप को प्रजेंट करने को तैयार हैं कि हम सब कैसा स्ट्रक्चर चाहते हैं। किस थिएटर कमांड को कौन हेड करेगा, इस पर आर्मी चीफ ने कहा कि एयरफोर्स की यूएसपी टेक्नॉलजी है, आर्मी की ह्यूमन रिसोर्स। एयरफोर्स की ताकत सेंट्रलाइजेश है और हमारी डी सेंट्रलाइजेशन। आर्मी लैंड फोर्स है और इससे बढ़ी है मल्टीडोमेन फोर्स। कोई एक आदमी कंट्रोल करेगा या ज्यादा लोग। ज्यादा हुए तो वक्त फैसला लेने में ही निकल जाएगा इसलिए एक आदमी चाहिए, चाहे वह किसी भी फोर्स का हो- आर्मी, नेवी या एयरफोर्स।
अग्निवीर में कोई कॉम्पिटिशन नहीं
अग्निपथ स्कीम और अग्निवीर को लेकर आर्मी चीफ ने कहा कि यह डर जताया जा रहा था कि अग्निवीर एक दूसरे से ही कंपीट करेंगे लेकिन ऐसा नहीं है। मैंने ग्राउंड पर देखा है, अग्निवीर खुश हैं और वे एक दूसरे से कंपीट नहीं कर रहे हैं बल्कि एक दूसरे को सहयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अग्निपथ स्कीम का मकसद सेना की यूथफुल प्रोफाइल थी और नॉर्दन फ्रंट पर रीबैलेंसिंग के लिए हम यूथ प्रोफाइल चाहिए था। उन्होंने कहा कि अग्निपथ स्कीम के तहत जिन युवाओं को चुन रहे हैं वे ज्यादा बेहतर है क्योंकि अब पहले लिखित परीक्षा ले रहे हैं फिर फिजिकल। मेंटल और फिजिकल सिनर्जी बेहतर है। उन्होंने कहा कि ये लगातार बढ़ने वाली प्रक्रिया है और इंटरनल स्कीम को लेकर कई डिस्कशन हो भी रहे हैं।

13 साल के ‘बिहारी बाबू’ ने ऑस्ट्रेलिया की उड़ाई धज्जियां, 58 गेंदों में शतक ठोक बनाया रिकॉर्ड

नई दिल्ली: बिहार के युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अंडर-19 यूथ टेस्ट मैच में धमाल मचा दिया है। ओपनर बल्लेबाज सूर्यवंशी ने सिर्फ 58 गेंद में शतक ठोककर रिकॉर्ड बना दिया। सूर्यवंशी यूथ टेस्ट में भारत की तरफ से सबसे तेज शतक लगाने का कारनामा किया है। बाएं हाथ के बल्लेबाज सूर्यवंशी खेल के पहले दिन 47 गेंद में तेजतर्रार 81 रन पर नाबाद वापस लौटे थे। दूसरे दिन क्रीज पर आते ही सूर्यवंशी ने एक बार फिर से आतिशी पारी खेलकर अपना शतक पूरा कर लिया।

हालांकि, वैभव सिर्फ दो गेंद से मोइन अली के रिकॉर्ड तोड़ने से चूक गए। यूथ टेस्ट मैच में सबसे तेज शतक लगाने का रिकॉर्ड इंग्लैंड के मोइन अली के नाम है। मोइन अली ने सा 2005 में इंग्लैंड के लिए खेलते हुए यूथ टेस्ट में सिर्फ 56 गेंद में शतक ठोका था, लेकिन एक मामले में वैभव मोइन से आगे निकल गए। दरअसल वैभव यूथ टेस्ट में सबस कम उम्र में शतक लगाने का विश्व रिकॉर्ड बनाया है। वैभव ने 13 साल 188 दिन में यह रिकॉर्ड अपने नाम किया है।
वैभव सूर्यवंशी पहली बार तब सुर्खियों में आए जब उन्होंने बिहार के लिए सिर्फ 12 साल की उम्र में फर्स्ट क्लास डेब्यू किया था। बिहार के समस्तीपुर जिले के रहने वाले वैभव अपनी तूफानी बैटिंग के लिए जाने जाते हैं। घरेलू क्रिकेट में लगातार दमदार खेल दिखाने वाले वैभव को भारत के यूथ टीम में चुना गया और उन्होंने अपनी बल्लेबाजी से कमाल कर दिया।
ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों की धज्जियां उड़ाने वाले वैभव ने विहान मल्होत्रा के साथ मिलकर एमए चिदंबरम स्टेडियम में टीम इंडिया को तूफानी शुरुआत दिलाई थी। खेल के पहले दिन दोनों बल्लेबाजों ने मिलकर बिना कोई विकेट गंवाए 103 रन बनाए थे। इस में वैभव ने 81 रनों का योगदान दिया था जबकि विहान ने 37 गेंद में 21 बनाए थे।

कानपुर टेस्ट के पांचवे दिन बांग्लादेश की दूसरी पारी 146 रनों पर सिमट गई है। ऐसे में भारत को इस मैच को जीतने के लिए 95 रन का टारगेट मिला है।

नई दिल्ली: भारत और बांग्लादेश के बीच कानपुर में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट मैच (India vs Bangladesh) के पांचवे दिन टीम इंडिया के गेंदबाजों ने कमाल का प्रदर्शन किया। भारतीय गेंदबाजों (Indian Bowlers) ने बांग्लादेश की टीम को दूसरी पारी में 146 रनों पर समेट दिया। जिसके चलते पहली पारी में 52 रन की बढ़त हासिल करने वाली टीम इंडिया (Team India) को अब मैच और सीरीज को अपने नाम करने के लिए 95 रनों का लक्ष्य मिला है।

अश्विन और जडेजा की शानदार बॉलिंग

भारत की तरफ से आर अश्विन (Ravichandran Ashwin), रवींद्र जडेजा (Ravindra Jadeja) और जसप्रीत बुमराह (Jasprit Bumrah) ने 3-3 विकेट झटके। जबकि आकाशदीप (Akash Deep) की झोली में भी एक विकेट आया। खेल के आखिरी दिन 62 ओवर शेष है। ऐसे में टीम इंडिया इस लक्ष्य को आसानी से हासिल कर सकती है।

शुरुआती तीन दिन चढ़े थे बारिश की भेंट

ग्रीन पार्क स्टेडियम (Green Park Stadium) में खेले जा रहे इस मैच में बारिश के चलते शुरुआती तीन दिनों में सिर्फ 35 ओवर ही डाले जा सके थे। पहले दिन सिर्फ 35 ओवर का ही खेल हो सका था जबकि दूसरे और तीसरे दिन तो एक भी गेंद फेंकी नहीं जा सकी थी, जिससे फैंस निराश थे। हालांकि, चौथे दिन के खेल में भारत ने बॉलिंग और बैटिंग में कमाल का प्रदर्शन किया था।

मां को सैल्यूट, पैर छुआ.. नए एयर चीफ अमर जीत सिंह ने कुछ यूं संभाला काम

नई दिल्ली : भारतीय वायुसेना के नए प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह का बेहद खास वीडियो सामने आया है। इसमें वायुसेना प्रमुख अपनी मां को सैल्यूट करते हुए और पैर छूकर आशीर्वाद लेते हुए नजर आ रहे हैं। ये खास तस्वीरें उस समय सामने आईं जब वायुसेना प्रमुख बुधवार सुबह राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पहुंचे थे। इसी दौरान उन्होंने देशवासियों के सामने खास मिसाल पेश की। एयर चीफ मार्शल एपी सिंह राष्ट्रीय युद्ध स्मारक में अपनी मां पुष्पंत कौर का आशीर्वाद लेते नजर आए।
अमर प्रीत सिंह का दिल छू लेने वाला वीडियो
इंडियन एयरफोर्स के नए चीफ का पदभार संभालने के बाद अमर प्रीत सिंह ने जिस तरह से अपनी मां का सम्मान किया, वो पल बेहद दिल छू लेने वाला था। वीडियो में नजर आ रहा कि उनकी मां व्हीलचेयर पर बैठी थीं। इसी दौरान वायुसेना प्रमुख एपी सिंह नेशनल वॉर मेमोरियल पहुंचे। यहां उन्होंने शहीदों को श्रद्धांजलि दी। इसी दौरान उन्होंने अपनी मां को सबसे पहले सैल्यूट किया फिर उनके पैर छुए। उन्हें बेहद प्यार से गले लगाया।
पहले किया सैल्यूट फिर मां के छुए पैर
मां के प्रति जिस तरह से भारतीय वायु सेना प्रमुख एपी सिंह ने प्यार और सम्मान जताया, वो हर किसी के लिए मिसाल है। एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने सोमवार को वायुसेना चीफ का कार्यभार संभाला है। उन्होंने वीआर चौधरी की जगह ली है। एयर चीफ एपी सिंह को 5 हजार घंटे से ज्यादा समय तक विमान उड़ाने का अनुभव है और वह लड़ाकू विमान के बेहद ट्रेंड पायलट हैं। एयर चीफ मार्शल सिंह अपने पिछले कार्यभार में वायु सेना के उपप्रमुख के रूप में कार्यरत थे।
वीआर चौधरी की जगह संभाली वायुसेना प्रमुख की जिम्मेदारी
एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी तीन साल तक वायु सेना की कमान संभालने के बाद रिटायर हुए। एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह का जन्म 27 अक्टूबर 1964 को हुआ था। उन्होंने दिसंबर 1984 में भारतीय वायु सेना में लड़ाकू विमान पायलट के तौर पर कमीशन प्राप्त किया। उन्होंने लगभग 40 वर्षों की अपनी लंबी सेवा में विभिन्न कमान, स्टाफ, निर्देशात्मक और विदेशी नियुक्तियों में काम किया।

सरकार रहेगी या जाएगी प्रशांत किशोर ने मोदी सरकार पर कर दी बड़ी भविष्यवाणी

नई दिल्ली: चुनावी रणनीतिकार और जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने मोदी सरकार पर बड़ा बयान दिया है। प्रशांत किशोर का कहना है कि पीएम मोदी और एनडीए सरकार की लोकप्रियता कम हुई है। इतना ही नहीं उन्होंने एनडीए सरकार के भविष्य को लेकर कहा कि बहुत कुछ आने वाले राज्यों के चुनाव पर निर्भर होगा। प्रशांत किशोर का कहना है कि बीजेपी के प्रदर्शन पर भी नजर रहेगी।
प्रशांत किशोर ने कहा कि अगले दो से ढाई साल में 9 राज्यों के चुनाव होने वाले हैं। इन चुनावों के रिजल्ट से आगे की दिशा-दशा तय होगी। उन्होंने कहा कि मोदी और सरकार की लोकप्रियता कम हुई है। जम्मू-कश्मीर, हरियाणा के बाद महाराष्ट्र, झारखंड के चुनाव होने वाले हैं। इन राज्यों के चुनाव के बाद दिल्ली, तमिलनाडु, बिहार, बंगाल और असम के चुनाव ढाई साल के अंदर होंगे।
यदि बीजेपी इन राज्यों में अच्छा प्रदर्शन करती है तो उनकी ताकत बनी रहेगी लेकिन नतीजे फेवर में नहीं आए तो इसका असर पड़ेगा। बिहार में बीजेपी को लेकर प्रशांत किशोर ने कहा कि वहां उनकी कोई बात नहीं कर रहा। उनके पास न कोई चेहरा है और न कोई प्रयास है। बीजेपी ने अपना नेतृत्व नीतीश कुमार के हवाले कर दिया है।
उन्होंने कहा कि बीजेपी की मजबूरी है कि वह उनको मुख्यमंत्री पद से हटा नहीं सकती और बीजेपी का कार्यकर्ता मान रहा है कि नीतीश के नाम पर बिहार में चुनाव जीत नहीं सकते। प्रशांत किशोर ने कहा कि बीजेपी को दिल्ली में सरकार चलानी है इसलिए वो नीतीश कुमार को हटा नहीं सकते। बीजेपी की हालत ऐसी है कि न वह बाएं जा सकते हैं न दाएं जा सकते हैं।
राष्ट्रीय और बिहार की राजनीति में बीजेपी की मौजूदा स्थिति को डिकोड करते हुए प्रशांत किशोर ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को लेकर भी बड़ा दावा किया। किशोर ने कहा कि कांग्रेस की स्थिति में थोड़ा सुधार हुआ है, साथ ही उन्होंने कहा कि गांधी परिवार ने पिछले 2 वर्षों में बहुत मेहनत की है।

पाकिस्तान बोला- भारतीय सिख रूपए नहीं, अमेरिकी डॉलर लाएं:भारतीयों से हो रही धोखाधड़ी के चलते फैसला, नवंबर में पाकिस्तान जाएंगे हजारों सिख श्रद्धालु

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की सरकार ने करतारपुर साहिब आने वाले भारतीय सिखों से रूपए की जगह अमेरिकी डॉलर लाने के लिए कहा है। इस फैसले के पीछे भारतीय नागरिकों के साथ हो रही धोखाधड़ी को वजह बताया गया है।

दरअसल भारतीयों को इंडियन करेंसी नोट के बदले तय कीमत से कम कीमत के पाकिस्तानी करेंसी नोट दिए जा रहे थे। पाकिस्तान की पंजाब सरकार में मंत्री रमेश सिंह अरोड़ा ने बताया कि, भारतीय सिखों को उनके पैसों के बदले, तय कीमत से कम के करेंसी नोट मिलने की शिकायतें सामने आई हैं।

शिकायतों के चलते ये फैसला लिया गया है। उन्होंने ये भी कहा कि भारतीय सिखों को यहां की सुविधाओं के लिए अतिरिक्त कीमत चुकाने की जरूरत नहीं है।

इस साल 14 नवंबर को सिखों के पहले गुरु, गुरु नानक देवजी की 555वीं जन्म जयंती के अवसर पर हजारों सिख श्रद्धालु पाकिस्तान में स्थित करतारपुर साहिब जा सकते हैं। पिछले साल लगभग 3 हजार सिख श्रद्धालुओं ने इस अवसर पर करतारपुर साहिब का दौरा किया था।
गुरुनानक ने जीवन के आखिरी दिन यही बिताए करतारपुर साहिब पाकिस्तान के नारोवाल जिले में रावी नदी के पास स्थित है। इसका इतिहास 500 साल से भी ज्यादा पुराना है। माना जाता है कि 1522 में सिखों के गुरु नानक देव ने इसकी स्थापना की थी। उन्होंने अपने जीवन के आखिरी साल यहीं बिताए थे और यही पर अपनी देह त्यागी थी। इसलिए, यह शहर सिखों के लिए विशेष महत्व रखता है।
सिखों का प्रमुख धार्मिक स्थल है करतारपुर करतारपुर कॉरिडोर 9 नवंबर 2019 को खोला गया था। भारत की तरफ से पीएम नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के तरफ से तत्कालीन पीएम इमरान खान ने इसका उद्घाटन किया था। यह पंजाब के गुरदासपुर जिले में डेरा बाबा नानक मंदिर को पाकिस्तान के गुरुद्वारा दरबार साहिब से जोड़ता है।

4 किलोमीटर का गलियारा भारतीय तीर्थ-यात्रियों को बिना वीजा के गुरुद्वारा दरबार साहिब में प्रवेश करने की अनुमति देता है। इससे पहले लोगों को वीजा लेकर लाहौर के रास्ते वहां जाना पड़ता था, जो कि एक लंबा रास्ता था। फिलहाल यहां जाने की फीस 20 डॉलर है, जिसे पाकिस्तान सरकार वसूलती है।